Ayodhya Ram Mandir : श्रीराम जन्मभूमि के नवनिर्मित हनुमान मंदिर पर लहराया विजय ध्वज, बजरंग दल के दिग्गजों ने किया ध्वजारोहण

हनुमान जयंती के अवसर पर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित हनुमान मंदिर पर बजरंग दल के दिग्गज नेताओं विनय कटियार, जयभान सिंह पवैया ने विधि-विधान से ध्वजारोहण किया। जानें ध्वज की विशेषताएं।

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, अयोध्या

धर्मनगरी अयोध्या में हनुमान जयंती का पर्व इस वर्ष अत्यंत विशेष और ऐतिहासिक रहा। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में परकोटे की दक्षिणी भुजा के मध्य स्थित श्री हनुमान मंदिर पर आज भव्य ध्वजारोहण संपन्न हुआ। इस गौरवमयी अवसर पर बजरंग दल के संस्थापक सदस्यों और पूर्व प्रमुखों ने सामूहिक रूप से हनुमान जी के शिखर पर विजय पताका फहराई।

बजरंग दल के संस्थापकों की उपस्थिति

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और बजरंग दल के आधार स्तंभ रहे दिग्गजों की उपस्थिति ने इस आयोजन को भावुक और ऐतिहासिक बना दिया। ध्वजारोहण कार्यक्रम में मुख्य रूप से बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार, मध्य प्रदेश के संगठन के पूर्व प्रमुख जयभान सिंह पवैया, कानपुर के पूर्व संगठन प्रमुख प्रकाश शर्मा, दिल्ली के पूर्व संगठन प्रमुख सुरेन्द्र जैन समेत कई नेता सम्मिलित रहे।

इन सभी नेताओं ने संयुक्त रूप से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हनुमान मंदिर के शिखर पर ध्वज स्थापित किया।

ध्वज की माप और भव्यता

मंदिर के शिखर पर स्थापित यह ध्वज अपनी विशिष्ट माप और भव्यता के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। दंड का तकनीकी विवरण इस प्रकार है।

दंड की ऊँचाई : शिखर पर स्थित दंड की कुल ऊँचाई 19 फीट 7 इंच है।

ध्वज की लंबाई (लहर) : हवा में लहराने वाला हिस्सा 9 फीट 3 इंच लंबा है।

ध्वज की चौड़ाई (लपेट) : डंडे से लिपटने वाला हिस्सा 4 फीट 7 इंच चौड़ा है।

परकोटे में हनुमान मंदिर का महत्व

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चारों ओर बने 'परकोटे' (सुरक्षा घेरा) की दक्षिणी भुजा के मध्य में हनुमान जी का यह मंदिर स्थापित है। शास्त्रों के अनुसार, प्रभु श्री राम के रक्षक के रूप में हनुमान जी सदैव उनके साथ विराजमान रहते हैं, इसीलिए मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था के प्रतीक स्वरूप परकोटे में उनकी स्थापना की गई है।

हनुमान जयंती के इस पावन उपलक्ष्य पर हुए ध्वजारोहण ने भक्तों के बीच भारी उत्साह का संचार किया है। मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और स्थानीय संतों ने इस आयोजन को राम मंदिर निर्माण के संकल्प की पूर्णता और हनुमान जी के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक बताया है।

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