Pema Khandu CBI Inquiry सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के खिलाफ 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेकों में कथित भ्रष्टाचार की CBI जांच के आदेश दिए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला और कोर्ट के निर्देश।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली
अरुणाचल प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू (Pema Khandu) के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए CBI (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) को जांच का जिम्मा सौंपा है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला करीब 1270 करोड़ रुपये के सार्वजनिक निर्माण कार्यों (Public Works Contracts) से जुड़ा है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर सरकारी ठेके अपने ही परिवार के सदस्यों और करीबियों से जुड़ी कंपनियों को आवंटित किए।
ये लगे हैं मुख्य आरोप
भाई-भतीजावाद : नियम-कानूनों को ताक पर रखकर मुख्यमंत्री के परिजनों की फर्मों को लाभ पहुंचाया गया।
बिना निविदा के आवंटन : कई ठेकों के आवंटन में पारदर्शी प्रक्रिया का पालन नहीं करने के दावे किए गए हैं।
वित्तीय अनियमितता : सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और 1270 करोड़ रुपये के फंड के हेरफेर के आरोप हैं।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
शीर्ष अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल CBI जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि समय सीमा भी तय की है।
प्रारंभिक जांच (PE) : कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में तुरंत एक Preliminary Enquiry (PE) दर्ज करे।
समय सीमा : सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि जांच की विस्तृत रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर अदालत में पेश की जानी चाहिए।
पारदर्शिता : कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी राजनीतिक दबाव के होनी चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
पेमा खांडू, जो अरुणाचल प्रदेश में भाजपा के प्रमुख चेहरे हैं, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश राज्य की राजनीति में भूचाल ला सकता है। विपक्षी दल लंबे समय से राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे, और अब शीर्ष अदालत के इस फैसले ने उन आरोपों को कानूनी आधार दे दिया है।
अब नजरें CBI की प्रारंभिक जांच पर टिकी
अब सभी की नजरें CBI की प्रारंभिक जांच पर टिकी हैं। यदि 16 हफ्तों के भीतर पेश की जाने वाली रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार के सबूत मिलते हैं, तो मुख्यमंत्री खांडू के खिलाफ नियमित FIR दर्ज की जा सकती है, जिससे उनकी कुर्सी पर भी खतरा मंडरा सकता है।

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