IIMC Alumni पुरानी यादें और नई जिम्मेदारी- लखनऊ में संपन्न हुआ आईआईएमसी 'कनेक्शन्स 2026'

प्रारब्ध न्यूज़ ब्यूरो, लखनऊ 

​भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के पूर्व छात्रों का साथ आना केवल एक रीयूनियन नहीं, बल्कि यादों और पत्रकारिता के साझा मूल्यों का उत्सव होता है। रविवार को नवाबों के शहर लखनऊ में आईआईएमसी एलुमनाई एसोसिएशन (IIMCAA) के उत्तर प्रदेश चैप्टर का वार्षिक मिलन समारोह 'कनेक्शन्स' हर्षोल्लास और भावुक स्मृतियों के बीच संपन्न हुआ।

​इस कार्यक्रम में जहाँ एक ओर भविष्य की नई जिम्मेदारियाँ तय हुईं, वहीं दूसरी ओर अपने एक साथी को खोने का गम भी साफ नजर आया।


स्व. प्रदीप मिश्रा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि


​कार्यक्रम की शुरुआत एक अत्यंत भावुक क्षण से हुई। संस्थान के पूर्व छात्र और वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मिश्रा के असामयिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने पत्रकारिता जगत में उनके अद्वितीय योगदान को याद किया।


​मंच से साझा की गई उनकी यादों ने उपस्थित सभी पूर्व छात्रों की आँखें नम कर दीं। यह इस बात का प्रमाण था कि आईआईएमसी का नेटवर्क केवल पेशेवर नहीं, बल्कि एक पारिवारिक जुड़ाव है।


संगठन की मजबूती पर जोर


चैप्टर ​अध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में संगठन की सक्रियता बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। दिल्ली से आए केंद्रीय नेतृत्व ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।


  • प्रमुख वक्ता: इमका के पूर्व अध्यक्ष प्रसाद सान्याल, कार्यकारी अध्यक्ष प्रभाष झा और महासचिव अतुल गुप्ता ने संगठन के विजन को साझा किया।
  • स्थानीय नेतृत्व: चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष संतोष वाल्मीकि, महासचिव पंचानन मिश्रा सहित कमलेश राठौर, भाई शैली, आलोक कुमार और अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साथियों का उत्साहवर्धन किया।

नई टीम, नई ऊर्जा: विशाल और हर्षित को मिली सचिव की कमान


​संगठन को नई गति देने के लिए 'कनेक्शन्स' के दौरान महत्वपूर्ण सांगठनिक नियुक्तियां भी की गईं। सर्वसम्मति से विशाल शुक्ला और हर्षित आजाद गुप्ता को उत्तर प्रदेश चैप्टर का सचिव चुना गया। उपस्थित एलुमनी ने आशा व्यक्त की कि नई टीम प्रदेश में संस्थान के नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाएगी।


एक साझा मंच, अनगिनत यादें


​प्रदेश के कोने-कोने से आए पत्रकारों, जनसंपर्क विशेषज्ञों और संचार पेशेवरों ने इस मंच पर न केवल अपने अनुभव साझा किए, बल्कि संस्थान के दिनों की यादों को भी ताजा किया। हंसी-मजाक, पुराने किस्सों और नेटवर्किंग के साथ इस दिन ने एक बार फिर साबित किया कि "आईआईएमसीएन एक बार, आईआईएमसीएन हमेशा के लिए"।

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