Raxaul-Kathmandu Rail Line : भारत-नेपाल के बीच 136 किमी लंबी रक्सौल-काठमांडू क्रॉस-बॉर्डर रेलवे लाइन का सर्वे और DPR पूरा हो गया है। पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड इस हाई-टेक रेल प्रोजेक्ट से व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।
भारत-नेपाल रेल प्रोजेक्ट: रक्सौल-काठमांडू रेलवे लाइन का DPR पूरा, जानें रूट और फायदे
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली
भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। रक्सौल (बिहार) से काठमांडू (नेपाल) को जोड़ने वाली प्रस्तावित क्रॉस-बॉर्डर रेलवे लाइन का विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और सर्वे का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह प्रोजेक्ट दक्षिण एशिया में रेल लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक संबंधों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं (Key Highlights)
कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KRCL) द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में आधुनिक इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना देखने को मिलेगा।
लंबाई : यह रेलवे लाइन लगभग 136 किलोमीटर लंबी होगी।
इलेक्ट्रिफिकेशन : यह पूरी तरह से इलेक्ट्रिफाइड (Electrified) रेल लाइन होगी, जो पर्यावरण के अनुकूल और तेज रफ्तार सफर सुनिश्चित करेगी।
हाई-टेक इंजीनियरिंग : पहाड़ी इलाका होने के कारण इस रूट पर कई बड़ी सुरंगें (Tunnels) और ऊंचे पुल (Bridges) बनाए जाएंगे।
कनेक्टिविटी : यह लाइन भारत के रक्सौल को सीधे नेपाल की राजधानी काठमांडू से जोड़ेगी।
व्यापार और पर्यटन में आएगा उछाल
इस रेल लिंक के शुरू होने से दोनों देशों को कई स्तरों पर लाभ होगा।
लॉजिस्टिक्स में सुधार : वर्तमान में भारत से नेपाल माल भेजने के लिए ट्रकों पर निर्भरता अधिक है। रेल मार्ग से माल ढुलाई सस्ती और समय की बचत करने वाली होगी।
पर्यटन को बढ़ावा : काठमांडू जाने वाले भारतीय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए यह सफर बेहद सुगम हो जाएगा।
आर्थिक विकास : सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
अगला कदम क्या है
DPR पूरा होने के बाद दोनों देशों की सरकारें इसके फंड अलॉटमेंट और निर्माण कार्य शुरू करने की समय सीमा पर चर्चा करेंगी। यह प्रोजेक्ट भारत की 'पड़ोस पहले' (Neighbourhood First) नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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