दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के जामसूंगढ़ कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद विजय दर्डा (Vijay Darda) और पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता को 11 साल बाद बरी कर दिया है। पढ़ें कोर्ट का पूरा फैसला। CBI Court Verdict.
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने एक दशक से भी अधिक पुराने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले (Coal Scam) में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व कांग्रेस सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेन्द्र दर्डा और पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता (HC Gupta) समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। विशेष सीबीआई न्यायाधीश सुनेना शर्मा ने साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों के आधार पर यह फैसला सुनाया।
आएं जानें क्या था पूरा मामला
यह मामला छत्तीसगढ़ के जामसूंगढ़ कोयला ब्लॉक (Jamsongarh Coal Block) के आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा था। सीबीआई (CBI) का आरोप था कि आवंटन प्रक्रिया के दौरान तथ्यों को छुपाया गया और अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। इस मामले में विजय दर्डा और अन्य पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा चल रहा था।
कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु
अदालत ने 11 साल लंबे मुकदमे के बाद अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं हैं।
गवाहों के बयान : किसी भी गवाह ने यह पुष्टि नहीं की कि आवंटन के दौरान किसी भी प्रकार का दबाव, लालच या धोखा दिया गया था।
दस्तावेजों की उपलब्धता : कोर्ट ने पाया कि आवेदन से जुड़ी ज्यादातर जानकारी पहले से ही संबंधित अधिकारियों के पास मौजूद थी।
सबूतों की कमी : अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि पैसों के लेनदेन का कोयला ब्लॉक आवंटन या विजय दर्डा द्वारा लिखे गए पत्रों से कोई सीधा संबंध था।
साक्ष्यों की कमी पर क्लीन चिट : साक्ष्यों की कमी के चलते अदालत ने सभी आरोपियों को ससम्मान बरी करने का आदेश दिया।
विस्तृत जानकारी और पृष्ठभूमि
कोयला घोटाला (Coal Scam) साल 2012 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के बाद सुर्खियों में आया था, जिसमें तत्कालीन सरकार पर कोयला ब्लॉकों के गलत आवंटन के कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा था। विजय दर्डा से जुड़ा यह मामला उसी व्यापक जांच का एक हिस्सा था।
पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता पर कई मामलों में आरोप लगे थे, लेकिन इस विशिष्ट मामले में कोर्ट ने उन्हें निर्दोष पाया है।

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