अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम यन्त्र की स्थापना की। जानें मन्दिर की 'परिपूर्णता' और समारोह की मुख्य बातें।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, अयोध्या
हिन्दू नववर्ष (विक्रम संवत) के पावन अवसर पर आज अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ मुहूर्त पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मन्दिर के द्वितीय तल पर विधि-विधान से 'श्रीराम यन्त्र' की स्थापना की। इसी के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने औपचारिक रूप से राम मन्दिर के 'परिपूर्ण' होने की घोषणा की।
द्वितीय तल पर पूजन और 40 सीढ़ियों का संकल्प
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने निर्धारित समय पर मन्दिर के द्वितीय तल पर पहुँचकर श्रीराम यन्त्र का स्थापना पूजन सम्पन्न किया। इस आध्यात्मिक कार्य के लिए वे स्वयं चालीस सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुँचीं। पूजन के पश्चात उन्होंने श्रीराम सभा और प्रभु श्रीराम लला की आरती कर आशीर्वाद लिया।
इस गरिमामयी अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, तीर्थ क्षेत्र ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा (सपत्नीक), आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी 'अम्मा', RSS वरिष्ठ कार्यकर्ता भैयाजी जोशी राष्ट्रपति के साथ रहे।
'पूर्ण' और 'परिपूर्ण' मन्दिर का अंतर
समारोह के दौरान तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरि ने मन्दिर के पूर्ण होने की घोषणा करते हुए एक महत्वपूर्ण व्याख्या दी। उन्होंने कहा कि ध्वजारोहण के साथ मन्दिर 'पूर्ण' हुआ था, लेकिन आज 'श्रीराम नाम यन्त्र' की स्थापना से इसे 'परिपूर्णता' मिली है। अब भक्तों को द्वितीय तल पर श्रीराम के साथ-साथ उनके 'नाम' (भगवान के नाम रूपी यन्त्र) के भी दर्शन होंगे।
उन्होंने राष्ट्रपति की तुलना पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर से करते हुए कहा कि धर्मकार्यों में उनका समर्पण अतुलनीय है।
योगी बोले - "सत्ता से संघर्ष का अंत, राष्ट्र मंदिर का उदय"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर अब केवल एक देवालय नहीं, बल्कि 'राष्ट्र मंदिर' का प्रतीक है। दुनिया में जहां अशांति है, वहीं भारत रामराज्य की अनुभूति कर रहा है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे केंद्रों पर 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए, जो बदलती सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है। उन्होंने मन्दिर आंदोलन के नायक अशोक सिंघल और सभी शिलापूजकों व पत्थर तराशने वाले शिल्पकारों का विशेष आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रपति का संबोधन: विकसित भारत और श्रीराम
अपने संबोधन का प्रारंभ 'जय श्रीराम' से करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भगवान राम स्वयं कहते हैं कि उन्हें अयोध्या अतिशय प्रिय है।
संविधान और राम : भारत के मूल संविधान की प्रति में भी प्रभु श्रीराम का चित्र अंकित है, जो हमारी सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है।
संकल्प : हम तेजी से 'विकसित भारत' की ओर बढ़ रहे हैं और संभव है कि 2047 के लक्ष्य को हम समय से पहले ही प्राप्त कर लें।
पर्यावरण : उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को आज की बड़ी आवश्यकता बताया और राम मंदिर दर्शन को अपना परम सौभाग्य माना।
माता अमृतानंदमयी बोलीं- 'भीतर का इंटरनेट'
माता अमृतानंदमयी ने श्रीराम यन्त्र की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए इसे 'बाहरी दुनिया के इंटरनेट से आंतरिक अध्यात्म के इंटरनेट' की ओर जुड़ने का माध्यम बताया। उन्होंने लव-कुश के संस्कारों और महर्षि वाल्मीकि के आश्रम का प्रसंग सुनाते हुए बच्चों में अच्छे संस्कार रोपित करने पर जोर दिया।
समारोह की झलकियाँ
सांस्कृतिक स्वागत : शहनाई वादक लोकेश आनन्द और बांसुरी वादक प्रवीण कुमार की टोली ने मधुर स्वरलहरियों से अतिथियों का स्वागत किया।
राष्ट्रवाद का स्वर : कार्यक्रम का संचालन तीर्थ क्षेत्र महासचिव चम्पत राय ने किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ हुआ।
दर्शन व्यवस्था : पूजन के बाद सभी आमंत्रित अतिथियों को क्रमवार तरीके से नवनिर्मित मन्दिर के दर्शन कराए गए।









0 Comments
if you have any doubt,pl let me know