उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रेस वार्ता में योगी सरकार के 9 वर्षों के कार्यकाल पर तीखा हमला बोला। भ्रष्टाचार, किसान उत्पीड़न और भूमि विकास बैंक के 'सूदखोरी' जैसे व्यवहार पर उठाए गंभीर सवाल। UP Congress.
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने योगी सरकार के 9 साल के कार्यकाल को जनता के लिए "विनाशकारी" करार दिया है। गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता में अजय राय ने सरकार के दावों की हवा निकालते हुए भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और किसान उत्पीड़न से जुड़े 9 गंभीर आरोप लगाए।
इस दौरान प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन डॉ. सीपी राय, मनीष हिंदवी, डॉ. उमा शंकर पाण्डेय सहित आगरा के किसान नेता भी मौजूद रहे।
9 साल के '9 विध्वंस', अजय राय के मुख्य आरोप
अजय राय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिन उपलब्धियों का ढिंढोरा पीट रहे हैं, उनकी असलियत जमीन पर कुछ और ही है। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं के जरिये सरकार को घेरा है।
भ्रष्टाचार का 'ग्रीन कॉरिडोर' : 15 मार्च 2026 को लखनऊ में 1519 करोड़ की लागत से बने ग्रीन कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ और अगले ही दिन सड़क धंस गई। यह सरकार के निर्माण कार्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार का जीता-जागता प्रमाण है।
सूदखोरों का आतंक : प्रदेश में जीरो टॉलरेंस की नीति फेल है। फतेहपुर में एक परिवार ने 5 लाख के बदले 27.50 लाख रुपये चुकाए, फिर भी प्रताड़ना के चलते पूरे परिवार ने आत्महत्या कर ली।
कर्मचारियों की अनदेखी : मोहनलालगंज के रोजगार सेवक रमेश प्रजापति ने मानदेय न मिलने के कारण आर्थिक तंगी में जान दे दी।
सुरक्षा में चूक : बदायूं के हाई-सिक्योरिटी HPCL प्लांट में घुसकर दो अधिकारियों की हत्या कर दी गई। आरोप है कि हत्यारा स्थानीय भाजपा विधायक का करीबी है।
सांस्कृतिक क्षति : अजय राय ने आरोप लगाया कि काशी के विकास के नाम पर वहां की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की 'हत्या' की गई है।
किसानों की बदहाली : आगरा के आलू किसानों की हालत दयनीय है। बुवाई की लागत 1200-1500 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि बिक्री मात्र 200-300 रुपये में हो रही है। यूरिया की कालाबाजारी भी चरम पर है।
ध्वस्त कानून व्यवस्था : पिछले तीन दिनों में गोरखपुर में पार्षद की हत्या, कानपुर में मासूम से दुष्कर्म, बरेली में डबल मर्डर और भदोही में जिंदा जलाने जैसी घटनाओं ने प्रदेश को दहला दिया है।
शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल : स्कूलों में बच्चियों से मिड-डे मील बनवाया जा रहा है (पीलीभीत का मामला) और मेरठ में 10 क्विंटल गेहूं सड़कर कचरा हो गया।
सरकारी बैंकों की 'सूदखोरी' : आगरा के भूमि विकास बैंक (राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) द्वारा किसानों के उत्पीड़न का मामला सबसे गंभीर रहा।
भूमि विकास बैंक : कर्ज के जाल में फंसते किसान
प्रेसवार्ता में आगरा से आए किसानों ने बैंक की 'लूट' की दास्तान सुनाई। अजय राय ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी मीडिया के सामने रखे।
किसान का नाम - लोन की राशि - चुकाई गई राशि - वर्तमान देनदारी (नोटिस) - स्थिति/टिप्पणी
भगवान दास - 18,000 (1997) - 4.18 लाख - - फर्जी तरीके से दोबारा लोन दर्ज
अतर सिंह - 2.88 लाख (2003) - 4.98 लाख - 20.14 लाख - वर्ष 2025 का नोटिस
शिवराम - 4.95 लाख (2014) - 3 लाख - 20 लाख - अत्यधिक ब्याज का बोझ
सुनील (सैया) - 1 लाख (2018) - 35,000 - 6.50 लाख - आत्महत्या कर ली
भूरी सिंह - 78,000 (2012) - 10,000 - 5.12 लाख - बैंक द्वारा उत्पीड़न
"योगी सरकार बीते नौ वर्षों में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। मुख्यमंत्री सिर्फ आत्ममुग्धता में डूबे हैं, जबकि प्रदेश का हर वर्ग युवा, किसान, महिला और मजदूर परेशान है। यह सरकार निर्माण की नहीं, बल्कि संस्थानों और जनमानस के विश्वास के विध्वंस की सरकार है।" - अजय राय, अध्यक्ष, यूपी कांग्रेस।





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