Madhya Pradesh दुनिया का एकमात्र घूमने वाला शिवलिंग, जानें श्योपुर के चमत्कारिक मंदिर का रहस्य

मध्यप्रदेश के श्योपुर में स्थित गोविंदेश्वर महादेव मंदिर का शिवलिंग चारों दिशाओं में घूमता है। जानें इस 294 साल पुराने चमत्कारिक मंदिर का इतिहास, रहस्य और पहुँचने का मार्ग। 360 Degree Rotating Shivling.

मध्यप्रदेश के श्योपुर में स्थित घूमने वाले गोविंदेश्वर महादेव।

प्रारब्ध न्यूज अध्यात्म डेस्क, लखनऊ 


आपने कभी ऐसे शिवलिंग के दर्शन किए हैं जिसे आप अपनी इच्छा अनुसार किसी भी दिशा में घुमा सकते हैं। सामान्यतः शिवलिंगों की जलहरी का मुख निश्चित दिशा (उत्तर या दक्षिण) में होता है, लेकिन मध्यप्रदेश के श्योपुर में एक ऐसा चमत्कारिक शिवलिंग है जो 360 डिग्री तक घूम जाता है।


इसे गोविंदेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं इस अनोखे मंदिर का इतिहास, इसके चमत्कार और यहां पहुंचने का तरीका।


स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना, चारों दिशाओं में घूमता शिवलिंग


श्योपुर के छार बाग मोहल्ले में स्थित एक अष्टफलक की छतरी के नीचे यह शिवलिंग स्थापित है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका निर्माण है।


धुरी पर आधारित : यह शिवलिंग एक विशेष धुरी (axis) पर टिका है।


दो भागों में निर्मित : यह लाल पत्थर से बना है, जिसके दो मुख्य भाग हैं, पिंड और जलहरी।


स्वतंत्र घूर्णन : भक्त अपनी सुविधानुसार इसे किसी भी दिशा में घुमाकर अभिषेक और पूजा कर सकते हैं।


294 साल पुराना इतिहास और राजा पुरुषोत्तम दास का समर्पण


इस अनोखे मंदिर का इतिहास करीब 3 शताब्दी पुराना है।


निर्माण : इसका निर्माण श्योपुर के गौड़ वंश के राजा पुरुषोत्तम दास ने वर्ष 1722 में करवाया था।


महाराष्ट्र से नाता : प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, पहले यह शिवलिंग महाराष्ट्र के सोलापुर में 'बाम्बेश्वर महादेव' के रूप में स्थापित था, जिसे बाद में यहां लाया गया।


शिवनगरी श्योपुर : राजा पुरुषोत्तम दास शिव के अनन्य भक्त थे, इसीलिए उन्होंने श्योपुर को शिवनगरी के रूप में विकसित किया था।


मंदिर से जुड़े चमत्कारिक रहस्य


स्थानीय लोगों और भक्तों के बीच इस मंदिर को लेकर कई गहरी मान्यताएं हैं।


स्वयं बजती हैं घंटियां : कहा जाता है कि साल में एक बार रात के समय मंदिर की घंटियां अपने आप बजने लगती हैं।


अपने आप बदलती दिशा : ऐसी मान्यता है कि आरती के बाद शिवलिंग अपने आप घूमने लगता है। कई बार दक्षिण मुखी रहने वाला यह शिवलिंग स्वतः उत्तर या पूर्व मुखी हो जाता है।


कष्टों से मुक्ति : माना जाता है कि यहां पूजा करने से सर्पदोष, पितृदोष और गृह क्लेश जैसी समस्याओं से तुरंत राहत मिलती है।


श्योपुर (गोविंदेश्वर महादेव) कैसे पहुंचें

श्योपुर मध्यप्रदेश का एक प्रमुख जिला है और यहां पहुंचना काफी आसान है।


सड़क मार्ग : श्योपुर, ग्वालियर (190 किमी), कोटा (राजस्थान - 110 किमी) और सवाई माधोपुर से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। यहां के लिए नियमित बसें उपलब्ध हैं।


रेलमार्ग : श्योपुर का अपना रेलवे स्टेशन है, जो ग्वालियर से नैरो गेज लाइन से जुड़ा है। हालांकि, नजदीकी बड़ा ब्रॉड गेज स्टेशन सवाई माधोपुर (70 किमी) या ग्वालियर है।


वायु मार्ग : सबसे नजदीकी हवाई अड्डा ग्वालियर (GWL) या जयपुर (JAI) है। यहां से टैक्सी या बस से आसानी से श्योपुर पहुंच सकते हैं।



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