Madhya Pradesh : पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर, यहां विराजते हैं शिव के आठ रूप, जानें 1500 साल पुरानी अष्टमुखी प्रतिमा का रहस्य

मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर अपनी दुर्लभ 7.25 फीट ऊंची अष्टमुखी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। जानें इस 1500 साल पुरानी गुप्तकालीन धरोहर के बारे में रोचक तथ्य।

मध्य प्रदेश के मंदसौर के अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर का शिवलिंग।

प्रारब्ध न्यूज डेस्क, लखनऊ 

मध्य प्रदेश का मंदसौर शहर न केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, बल्कि यह दुनिया के इकलौते अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर का घर भी है। शिवना नदी के तट पर स्थित यह मंदिर अपनी अद्वितीय वास्तुकला और आध्यात्मिक ऊर्जा के कारण 'मालवा के कैलाश' के रूप में प्रसिद्ध है।

शिवना नदी से प्रकट हुई दिव्य प्रतिमा

स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, भगवान शिव की यह विशाल प्रतिमा शिवना नदी के गर्भ से प्राप्त हुई थी। ऐतिहासिक शिलालेखों के आधार पर, इस मूर्ति को 5वीं-6ठी शताब्दी (गुप्त काल) की धरोहर माना जाता है। यह प्रतिमा नेपाल के पशुपतिनाथ (चतुर्मुखी) से भी विशिष्ट है क्योंकि इसमें महादेव के आठ रूपों के दर्शन एक साथ होते हैं।

अष्टमुखी प्रतिमा की अनूठी विशेषताएं

मंदसौर की यह प्रतिमा शिल्पकारी का एक बेजोड़ नमूना है।

ऊंचाई और वजन : प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 7.25 फीट है और इसका वजन करीब 4,600 किलोग्राम है।

दो परतों में मुख : मूर्ति में आठ चेहरे हैं, जिन्हें दो पंक्तियों में उकेरा गया है (चार मुख ऊपर और चार नीचे)।

अष्ट रूप का प्रतीक : ये आठ मुख भगवान शिव के आठ विशिष्ट पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं:-

1. भव 2. पशुपति 3. महादेव 4. ईशान, 5. रुद्र 6. शर्व 7. उग्र 8. अशनी।

श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण

मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर भारत के प्रमुख शैव तीर्थों में गिना जाता है। सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर यहाँ लाखों की भीड़ उमड़ती है। नदी के किनारे स्थित होने के कारण, मानसून के दौरान जब शिवना नदी उफान पर होती है, तो वह महादेव के चरणों का अभिषेक करती है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

विशेष तथ्य : यह दुनिया की एकमात्र ऐसी प्रतिमा मानी जाती है जिसमें शिव के सौम्य और रौद्र, दोनों रूपों का समावेश आठ अलग-अलग मुखों के माध्यम से किया गया है।

दर्शन और आरती का समय (Temple Timings)

पशुपतिनाथ मंदिर के द्वार भक्तों के लिए सुबह जल्दी खुल जाते हैं। यहां की भस्म आरती और श्रृंगार विशेष रूप से दर्शनीय होता है।

मंदिर खुलने का समय : सुबह 5:30 बजे से रात 10:00 बजे तक।

मंगला आरती : सुबह 6:00 बजे।

मध्याह्न भोग : दोपहर 12:00 बजे।

संध्या आरती : शाम 7:30 बजे (शिवना नदी के तट पर होने वाली यह आरती बेहद सुकून देती है)।

शयन आरती : रात 9:30 बजे।

नोट : त्यौहारों और विशेष अवसरों पर समय में बदलाव हो सकता है।

मंदसौर पशुपतिनाथ मंदिर कैसे पहुंचें (How to Reach)

मंदसौर मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप यहां अपनी सुविधा अनुसार परिवहन के इन साधनों से पहुँच सकते हैं।

रेल मार्ग द्वारा (By Train)

मंदसौर का अपना रेलवे स्टेशन है जो दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलवे लाइन (अजमेर-रतलाम ट्रैक) पर स्थित है। रतलाम और चित्तौड़गढ़ से यहाँ के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।

सड़क मार्ग द्वारा (By Road)

मंदसौर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 79) पर स्थित है। इंदौर (लगभग 210 किमी), उज्जैन (150 किमी) और राजस्थान के प्रतापगढ़ या नीमच से यहाँ के लिए नियमित बसें और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।

वायु मार्ग द्वारा (By Air)

सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देवी अहिल्या बाई होल्कर एयरपोर्ट, इंदौर है, जो यहाँ से लगभग 215 किमी दूर है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी या बस के जरिए मंदसौर पहुँच सकते हैं।

पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सुझाव

सबसे अच्छा समय : मानसून के दौरान (जुलाई-सितंबर) जब शिवना नदी लबालब होती है, या फिर सर्दियों (अक्टूबर-मार्च) में मौसम सुहावना रहता है।

पास के अन्य आकर्षण : आप यहां से गांधी सागर बांध और ऐतिहासिक हिंगलाजगढ़ किला भी घूमने जा सकते हैं।

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