लखनऊ में ट्रेड यूनियन की हड़ताल का बैंकों पर मिला-जुला असर। UFBU ने हड़ताल को राजनीतिक बताते हुए दूरी बनाई। SBI और IOB में कामकाज सामान्य, जानें पूरी रिपोर्ट।
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| फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव (दाएं) तथा मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी (बायें)। |
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित देशभर में आज यानी गुरुवार को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की वजह से बैंकिंग सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित रहीं। खास बात यह रही कि बैंक कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने इस हड़ताल में शिरकत नहीं की, जिसके चलते कई प्रमुख बैंकों में कामकाज सामान्य रूप से सुचारू रहा।
किन बैंकों पर पड़ा हड़ताल का असर
हड़ताल का मुख्य प्रभाव सार्वजनिक क्षेत्र के उन बैंकों में देखा गया, जहाँ कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित तीन प्रमुख संगठनों AIBEA, AIBOA और BEFI का दबदबा रहा है। इस हड़ताल की वजह से प्रभावित बैंकों में इंडियन बैंक, केनरा बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक जैसे संस्थान रहे। इस बैंकों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे, जिससे कामकाज बाधित हुआ।
इन बैंकों में कामकाज रहा सामान्य
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) जैसे बड़े बैंक पूरी तरह खुले रहे। यहां ग्राहकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
हड़ताल को बताया 'राजनीतिक'
यूएफबीयू के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव और मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने स्पष्ट किया कि आज की यह हड़ताल पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थी। उनके अनुसार, इन तीन संगठनों की अपनी वैचारिक और संगठनात्मक मजबूरियां हैं, जिसके कारण उन्हें राजनीतिक हड़तालों में शामिल होना पड़ता है।
पांच-दिवसीय बैंकिंग की मांग बरकरार
संगठन ने याद दिलाया कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के सभी 9 संगठनों ने हाल ही में 27 जनवरी को '5-दिवसीय बैंकिंग' (5-Day Banking) की मांग के समर्थन में राष्ट्रव्यापी सफल हड़ताल की थी। वह आंदोलन विशुद्ध रूप से बैंकिंग सुधारों और कर्मचारियों की कार्य स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए था।
आज की स्थिति यह रही कि लखनऊ के कई बैंकिंग केंद्रों पर यूनियन कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन तो किया, लेकिन UFBU की अनुपस्थिति के कारण हड़ताल का व्यापक असर नहीं हो सका।
"आज की हड़ताल का बैंक कर्मचारियों के औद्योगिक हितों या सेवा संबंधी मुद्दों से कोई सीधा सरोकार नहीं है। यही कारण है कि UFBU के अन्य घटक दल इसमें शामिल नहीं हुए।" अनिल तिवारी, मीडिया प्रभारी।
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