Shankaracharya Avimukteshwaranand POCSO Case : यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज POCSO मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस ने इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार दिया है।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
Ajay Rai letter to PM Modi : उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध दर्ज हुए 'पॉक्सो प्रकरण' (POCSO Case) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। कांग्रेस ने इस पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे सत्ता का दुरुपयोग और 'राजनीतिक रंजिश' करार दिया है।
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| कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा पत्र। |
कुंभ की अव्यवस्थाओं पर घेरा, तो हुई कार्रवाई
अजय राय ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने हाल ही में महाकुंभ की अव्यवस्थाओं को लेकर प्रदेश सरकार की आलोचना की थी। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की कमियां उजागर करने के तुरंत बाद उनके विरुद्ध इस तरह की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करना सीधे तौर पर 'राजनीतिक प्रतिशोध' की ओर इशारा करता है।
संविधान और धार्मिक स्वायत्तता का हवाला
कांग्रेस पार्टी ने इस मामले में संवैधानिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए मुख्य बिंदु उठाए हैं।
अनुच्छेद 25-26 का सम्मान : भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 और 26 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता प्रदान करता है। किसी भी आध्यात्मिक गुरु के विरुद्ध बिना ठोस आधार के की गई कार्रवाई इन अधिकारों का उल्लंघन है।
स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग : अजय राय ने मांग की है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र या केंद्रीय एजेंसी (जैसे CBI) से कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
लोकतंत्र की मर्यादा : पत्र में कहा गया है कि किसी भी आध्यात्मिक पद की गरिमा को सियासी रंजिश का हथियार बनाना लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
"सत्ता के हंटर से संतों की आवाज़ दबाने की कोशिश बंद होनी चाहिए। हम मांग करते हैं कि जांच पूरी तरह पारदर्शी हो ताकि सत्य सामने आ सके।" - अजय राय, अध्यक्ष, यूपी कांग्रेस।
आएं जाने क्या है पूरा विवाद
गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी प्रखरता से जनहित और धार्मिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। हाल के दिनों में कुंभ मेले के प्रबंधन और प्रशासनिक त्रुटियों पर उनके कड़े रुख के बाद उन पर कानूनी शिकंजा कसा गया है, जिसे विपक्षी दल सरकार की दमनकारी नीति मान रहे हैं।


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