लखनऊ में उत्तरायणी कौथिग 2026 का भव्य आगाज। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया उद्घाटन। जानिए 15 दिवसीय मेले और शोभायात्रा की पूरी जानकारी।
नवाबों के शहर लखनऊ में आज पहाड़ की संस्कृति, परंपरा और लोक-रंगों का अद्भुत समागम देखने को मिला। पर्वतीय महापरिषद के रजत जयंती वर्ष (25 वर्ष पूर्ण होने) के ऐतिहासिक अवसर पर 15 दिवसीय 'उत्तरायणी कौथिग-2026' का भव्य शुभारंभ हो गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेला स्थल पहुँचकर दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया।
कौथिग के प्रथम दिन का मुख्य आकर्षण महानगर रामलीला मैदान से निकलने वाली विशाल शोभायात्रा रही। दोपहर दो बजे शुरू हुई इस यात्रा में उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक साफ दिखाई दी।
सांस्कृतिक दल : शोभायात्रा में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी संस्कृति के विविध रंग दिखे। उत्तराखंड से आए छोलिया नर्तकों के दल ने अपने हैरतअंगेज करतबों से लखनऊवासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में भागीदारी : लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कल्याणपुर, गोमतीनगर, सरोजनीनगर, सीतापुर रोड और तेलीबाग से आए सांस्कृतिक दलों के साथ-साथ भारतीय भूतपूर्व सैनिकों के दल ने भी कदमताल किया।
मुख्य आकर्षण : नंदा राजजात यात्रा की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं और पुरुषों ने ढोल-दमाऊ और नगाड़ों की थाप पर थिरकते हुए पूरे माहौल को 'पहाड़ी' रंग में सराबोर कर दिया।
रास्ते में फूलों की वर्षा कर किया शोभायात्रा का स्वागतयह भव्य शोभायात्रा महानगर रामलीला मैदान से प्रारंभ होकर गोल मार्केट चौराहा, निशातगंज, बादशाहनगर और खाटूश्याम मंदिर होते हुए शाम पांच बजे मेला स्थल 'पं. गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन' पहुँची। रास्ते भर लोगों ने फूलों की वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। मेला स्थल पहुँचते ही धार्मिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पं. नारायण दत्त पाठक और पुरोहितों ने मंत्रोच्चारण के साथ दल का अभिनंदन किया, वहीं महिलाओं ने 'शगुन आंखर' और मंगलगीत गाकर कौथिग की सफलता की कामना की।
रजत जयंती वर्ष की विशेष झांकियांइस वर्ष पर्वतीय महापरिषद अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। शोभायात्रा में प्रदर्शित झांकियों के माध्यम से महापरिषद के सामाजिक कार्यों को दर्शाया गया। उन झांकियों की खासियत यहां पढ़ें।
महाकुंभ प्रयागराज 2025 : वरिष्ठ नागरिकों की यात्रा के लिए किए गए प्रयास।
आपदा राहत : वर्ष 2013 की उत्तराखंड आपदा के दौरान थराली तक पहुँचाई गई सहायता।
चिल्लर कोष योजना : जरूरतमंदों की मदद के लिए चलाई जा रही मुहिम।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रयासों को सराहा
सायंकालीन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्वागत पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारियों ने पुष्पगुच्छ और प्रतीक चिह्न देकर किया। मुख्यमंत्री ने लखनऊ की धरती पर उत्तराखंड की संस्कृति को जीवित रखने के लिए महापरिषद के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कौथिग केवल एक मेला नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
आयोजन समिति की सक्रियता
कार्यक्रम को सफल बनाने में पर्वतीय महापरिषद के मुख्य संयोजक टी.एस. मनराल, संयोजक के.एन. चंदोला, अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी और महासचिव महेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में पूरी टीम जुटी रही। मीडिया प्रभारी भुवन पाण्डेय ने बताया कि अगले 14 दिनों तक यहाँ उत्तराखंड के व्यंजनों, हस्तशिल्प और लोक संस्कृति का अनवरत प्रवाह देखने को मिलेगा।
उत्तरायणी कौथिग के प्रमुख आकर्षण और कार्यक्रम
पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित इस मेले में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक विभिन्न सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियाँ होंगी।
दिनांक - मुख्य कार्यक्रम
14 जनवरी उद्घाटन दिवस : भव्य शोभायात्रा (महानगर से कौथिग स्थल तक), खिचड़ी भोज और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आधिकारिक उद्घाटन।
15 - 18 जनवरी सांस्कृतिक संध्या : उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायकों द्वारा प्रस्तुतियाँ, बेबी शो, और स्थानीय कलाकारों द्वारा झोड़ा-चांचरी नृत्य।
19 - 22 जनवरी प्रतियोगिताएं : स्कूली बच्चों के लिए चित्रकला, फैंसी ड्रेस, और 'उत्तराखंड सामान्य ज्ञान' क्विज। साथ ही महिलाओं के लिए पारंपरिक रंगोली (एपण) प्रतियोगिता।
23 - 25 जनवरी लोक रंग : कुमाऊंनी और गढ़वाली नाटकों का मंचन, छोलिया नृत्य के विशेष सत्र और 'पर्वत गौरव सम्मान' समारोह।
26 जनवरी गणतंत्र दिवस विशेष : देश भक्ति के गीतों के साथ उत्तराखंड के वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि।
27 - 28 जनवरी समापन समारोह : पुरस्कार वितरण, मुख्य कलाकारों की विदाई प्रस्तुति और भव्य सांस्कृतिक झांकी।
मेले के अन्य विशेष आकर्षण
पहाड़ी व्यंजन : स्टॉल्स पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध व्यंजन जैसे- कापली, झंगोरे की खीर, गहत की दाल, और बाल मिठाई उपलब्ध रहेंगे।
हस्तशिल्प : अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के ऊनी वस्त्र, तांबे के बर्तन और पहाड़ी जड़ी-बूटियों का बाजार।
प्रदर्शनी : उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों (जैसे केदारनाथ, बद्रीनाथ) और 25 वर्षों की महापरिषद की यात्रा को दर्शाती विशेष गैलरी।
स्थान : पं. गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन, गोमती रिवरफ्रंट के पास, लखनऊ।




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