Lucknow : उत्तरायणी कौथिग-2026: लखनऊ में बिखरे उत्तराखंडी संस्कृति के सतरंगी रंग, तीसरे दिन उमड़ा जनसैलाब

उत्तरायणी कौथिग 2026 लखनऊ : यहां के बीरबल साहनी मार्ग पर आयोजित 'उत्तरायणी कौथिग-2026' के तीसरे दिन उत्तराखंडी संस्कृति की धूम रही। नृत्य प्रतियोगिताओं और लोकगीतों ने दर्शकों का मन मोह लिया। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

पर्वतीय महापरिषद, उत्तरायणी मेला लखनऊ, उत्तराखंडी संस्कृति, छोलिया नृत्य, रजत जयंती महोत्सव

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ 

​नवाबों के शहर लखनऊ में इन दिनों पहाड़ों की ठंडी हवाओं के साथ उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गर्माहट महसूस की जा रही है। बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन में आयोजित 15 दिवसीय उत्तरायणी कौथिग-2026 अपने शबाब पर है। मेले के तीसरे दिन 'प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो' की टीम ने देखा कि कैसे गोमती के तट पर मिनी उत्तराखंड जीवंत हो उठा है।

रजत जयंती वर्ष का भव्य उल्लास

​पर्वतीय महापरिषद के लिए यह वर्ष अत्यंत गौरवशाली है, क्योंकि परिषद अपनी स्थापना के 25 वर्ष (रजत जयंती) पूर्ण कर रही है। इसी उपलक्ष्य में आयोजित इस 15 दिवसीय मेले के तीसरे दिन की शुरुआत बेहद ऊर्जावान रही। भव्य स्टेज पर सुबह से ही रंगारंग कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया, जिसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

नृत्य प्रतियोगिताओं में दिखा हुनर

​मेले के प्रथम सत्र का मुख्य आकर्षण एकल एवं सामूहिक नृत्य प्रतियोगिताएं रहीं। बसन्त भट्ट के संयोजन में आयोजित इन प्रतियोगिताओं में 3 वर्ष के बच्चों से लेकर युवाओं तक, कुल 53 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

  • निर्णायक मंडल : आकांक्षा आनंद और मेनका सक्सेना ने प्रतिभागियों के हुनर को परखा।
  • संचालन : प्रतियोगिता का सफल संचालन संरक्षक जेपी डिमरी और साहित्य प्रकोष्ठ प्रभारी ज्ञान पंत ने किया।
विजेताओं की सूची

3 से 8 वर्ष आयुवर्ग : कृषिका भाकुनी (प्रथम), सान्वी बिष्ट (द्वितीय), भाव्या (तृतीय) और पतिष्ना पाण्डेय (सांत्वना)।

9 से 13 वर्ष आयुवर्ग : तनिष्का आर्या (प्रथम), आदित्य पाण्डे (द्वितीय), लतिका बिष्ट (तृतीय) और यशिका नेगी (सांत्वना)।

13 वर्ष से अधिक आयुवर्ग : वन्दना सिंह (प्रथम), शीतल धामी (द्वितीय), मंशिका कनौजिया (तृतीय) और गरिमा मेहरा (सांत्वना)।

सामूहिक नृत्य : जोहार सांस्कृतिक संस्था ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मोनिका मेहरा ग्रुप, पल्लवी दल व किरन चैबे क्रमशः अन्य स्थानों पर रहे।

लोक संगीत और 'चम्म मुखड़ी' का विमोचन

​दोपहर के सत्र में विकासनगर के क्षेत्रीय कलाकारों ने पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर उत्तराखंडी लोक कला का प्रदर्शन किया। इसी मंच से म्युजिकल उत्तराखण्ड स्टूडियो के नए गीत 'चम्म मुखड़ी' का विमोचन किया गया। इस गीत को राकेश रमेला और नीरू बोरा पर फिल्माया गया है। खिली धूप और नदी के किनारे आयोजित इस कौथिग के नजारों ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया।

​बाजार में गर्म कपड़ों की भारी मांग

​मीडिया प्रभारी भुवन पाण्डेय ने बताया कि सुबह और शाम की कड़ाके की ठंड के कारण मेले में आए ग्राहकों ने गर्म कपड़ों के स्टालों पर भारी भीड़ लगाई। उत्तराखंड के हस्तशिल्प से बने जैकेट, गरम टोपियां, वास्केट और रंग-बिरंगे लेडीज गरम सूट की जमकर बिक्री हुई। लोग न केवल संस्कृति का आनंद ले रहे हैं, बल्कि पहाड़ी उत्पादों की खरीदारी में भी गहरी रुचि दिखा रहे हैं।

​सायंकालीन सत्र: भक्ति और उल्लास का संगम

​शाम का सत्र आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना से भरपूर रहा। कार्यक्रम का आरंभ पर्वतीय महापरिषद के उपाध्यक्ष महेंद्र पंत द्वारा रचित टाइटल सॉन्ग “उत्तरैनी कौथिग मा सभन को सत्कार छ...” से हुआ।

मुख्य अतिथि : विशिष्ट अतिथि पुष्पिला बिष्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर संध्याकालीन सत्र का शुभारंभ किया।

सम्मान समारोह : महापरिषद के अध्यक्ष गणेश जोशी, महासचिव महेंद्र रावत, मुख्य संयोजक ठाकुर सिंह मनराल और संरक्षक लाबीर सिंह बिष्ट ने अतिथियों का स्वागत प्रतीक चिह्न और पुष्पगुच्छ देकर किया।

​इस अवसर पर केएस रावत, एमएस मेहता, हरीश काण्डपाल, पीसी पन्त, आनंद कपकोटी और मंजू भास्कर शर्मा सहित परिषद के तमाम पदाधिकारी और गणमान्य व्यक्ति रहे।

​मेहमान कलाकारों ने बांधा समां

​रात ढलते-ढलते लोक कलाकारों ने मंच पर ऐसी प्रस्तुतियां दीं कि दर्शक अपनी जगहों पर थिरकने को मजबूर हो गए।

ईशा मर्तोलिया : उत्तराखंड से आई मेहमान कलाकार ईशा मर्तोलिया के लोक नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

चन्द्रकला : उन्होंने 'तेरी मेरी प्रीत' और 'यू डाना का पार' जैसे सुरीले गीतों से समां बांधा।

राकेश जोशी : 'हिट दे शाली म्यार दगाड़' और 'सूवा मेरो ड्राइवरा' जैसे गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा।

आनंद कपकोटी : लखनऊ के लोकप्रिय गायक आनंद कपकोटी ने अपनी गायकी से स्थानीय दर्शकों का दिल जीत लिया।

​आज के कार्यक्रम यानी 17 जनवरी

​मेले के चौथे दिन यानी 17 जनवरी को उत्तराखंड के विख्यात कलाकार संजय पाटनी और विनोद सामंत अपने लोकगीतों की प्रस्तुति देंगे। आयोजकों ने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर उत्तराखंडी संस्कृति का आनंद लेने की अपील की है।

आप मेले में जाने की बना रहे योजना

उत्तरायणी कौथिग न केवल एक मेला है, बल्कि यह प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक महाकुंभ है। यदि आप हस्तशिल्प, पहाड़ी भोजन और लोक संगीत के शौकीन हैं, तो 17 जनवरी की शाम संजय पाटनी की जादुई आवाज सुनने जरूर आएं।

कार्यक्रम का स्थान : पंडित गोविंद बल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन, बीरबल साहनी मार्ग, लखनऊ।

प्रातः एवं दोपहर सत्र (प्रतियोगिता और स्थानीय कला)

समय : सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक

मुख्य आकर्षण : विभिन्न स्कूली बच्चों और स्थानीय संस्थाओं के बीच लोक नृत्य और लोकगीत प्रतियोगिताएं जारी रहेंगी।

उत्तराखंड के पारंपरिक परिधानों (पिछौड़ा, ढाँटू) में सजे कलाकारों द्वारा मंच पर लघु प्रस्तुतियां।

छोलिया दल का प्रदर्शन (जो मेले के बीच-बीच में दर्शकों का उत्साहवर्धन करेंगे)।

सायंकालीन मुख्य सत्र (सितारों भरी शाम)

समय : शाम 5:30 बजे से रात 9:30 बजे तक

दीप प्रज्ज्वलन : शाम 5:30 बजे गणमान्य अतिथियों द्वारा।

मुख्य प्रस्तुति (संजय पाटनी और विनोद सामंत): शाम 6:30 बजे के बाद उत्तराखंड के प्रसिद्ध मेहमान कलाकार संजय पाटनी और विनोद सामंत मंच संभालेंगे। वे अपने लोकप्रिय कुमाऊंनी और गढ़वाली लोकगीतों से समां बांधेंगे।

मेले के अन्य विशेष आकर्षण (पूरा दिन)

पहाड़ी जायका (फूड स्टॉल) : आप यहाँ के मशहूर 'मडुवे की रोटी', 'झंगोरे की खीर', 'सिंगौड़ी', 'बाल मिठाई' और 'आलू के गुटके' का आनंद ले सकते हैं।

हस्तशिल्प और खरीदारी : ऊनी कपड़े (पश्मीना, दन, टोपियां), तांबे के बर्तन और उत्तराखंड के जैविक उत्पाद (दालें, पहाड़ी मसाला, शहद) बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे।

प्रदर्शनी : उत्तराखंड की ऐतिहासिक धरोहरों और रजत जयंती वर्ष (25 साल) की यात्रा को दर्शाती एक विशेष फोटो गैलरी।

दर्शकों के लिए सुझाव

 17 जनवरी को संजय पाटनी जैसे बड़े कलाकारों की मौजूदगी के कारण शाम को भारी भीड़ होने की संभावना है। यदि आप मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेना चाहते हैं, तो शाम 5:00 बजे तक मेला स्थल पहुँच जाना बेहतर होगा।

Post a Comment

0 Comments