Success story : कॉर्पोरेट की चमक-धमक छोड़ मिट्टी से जुड़े अंकुर-रश्मि; Tuhi Farm से बदल रहे हैं खेती की तस्वीर

कॉर्पोरेट की सुख-सुविधाएं छोड़ अंकुर और रश्मि ने मिट्टी से जुड़ने का फैसला किया। जानें कैसे Tuhi Farm के जरिए उन्होंने आधुनिक खेती को नई दिशा दी और आज वे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी यहाँ पढ़ें।

अपने फार्म हाउस की उपज के साथ अंकुर और रश्मि।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कानपुर 

आज के दौर में ऑर्गेनिक फूड केवल एक लाइफस्टाइल च्वाइस नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन के लिए एक आवश्यकता बन गया है। जब खेतों में अधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में हमारा खान-पान सेहत के लिए सुरक्षित नहीं बचा है। यही वजह है कि तरह तरह की बीमारियां घेर रही हैं। बुढ़ापे में होने वाली बीमारियों से बच्चों व युवा पीढ़ी बेहाल है। हमारे खान-पान में बढ़ते रसायनिक पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए कानपुर के एक दंपत्ति, अंकुर और रश्मि सचान ने स्वयं मोर्चा संभाला है। इस समस्या का समाधान खुद तलाशने का फैसला किया। कॉर्पोरेट जगत की चमक-धमक छोड़कर मिट्टी से जुड़ गए। अब Tuhi Farm के जरिए खेती की तस्वीर बदलने में जुट गए।

बेंगलुरु से कानपुर तक का सफर

​अंकुर और रश्मि बेंगलुरु में एक स्थिर और अच्छी तनख्वाह वाली कॉर्पोरेट नौकरी कर रहे थे। लेकिन अपनी जड़ों और शुद्ध खान-पान के प्रति उनके लगाव ने उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने अपनी पुश्तैनी ज़मीन पर कुछ नया और टिकाऊ करने के उद्देश्य से नौकरी छोड़ दी और कानपुर लौट आए। यहीं से 'Tuhi Farm' की नींव पड़ी।

5.5 एकड़ में टिकाऊ 'एग्रोफॉरेस्ट' का निर्माण

​Tuhi Farm महज एक खेत नहीं, बल्कि एक टिकाऊ एग्रोफॉरेस्ट (Agroforest) है। अपनी 5.5 एकड़ की पुश्तैनी ज़मीन पर उन्होंने रासायनिक खेती को पूरी तरह त्याग कर पुनर्योजी (Regenerative) खेती को अपनाया है।

​इस खेत की खासियतें निम्नलिखित हैं।

विविधता: यहाँ 30 से अधिक प्रकार के फल, सब्जियाँ और अनाज उगाए जाते हैं।

रसायन मुक्त : किसी भी प्रकार के कीटनाशक या कृत्रिम उर्वरक का उपयोग नहीं किया जाता।

इको-सिस्टम : यहाँ प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर मिट्टी की उर्वरता को स्वाभाविक रूप से बढ़ाया जाता है।

किफायती दाम और बढ़ता विश्वास

​अंकुर और रश्मि का मानना है कि सेहतमंद भोजन पर सबका हक होना चाहिए। इसलिए, उन्होंने अपने उत्पादों की कीमत स्थानीय बाज़ार से केवल 20–30% अधिक रखी है, ताकि यह आम जनता के लिए सुलभ रहे। आमतौर पर ऑर्गेनिक उत्पादों के दाम दोगुने होते हैं, लेकिन Tuhi Farm ने इस धारणा को बदल दिया है।

सफलता के आंकड़े

​आज Tuhi Farm एक सफल मॉडल बन चुका है। उनके पास हर महीने 200 से 300 ऑर्डर आते हैं, जिससे उन्हें ₹40,000 से ₹50,000 की मासिक आय हो रही है। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि सबसे अर्थपूर्ण व्यवसाय हमेशा तेज़ी से नहीं, बल्कि सही दिशा और सही नियत के साथ बढ़ते हैं। अंकुर और रश्मि की यह पहल न केवल पर्यावरण को बचा रही है, बल्कि समाज को एक स्वस्थ विकल्प प्रदान कर रही है।

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