दिनांक : 14 जनवरी 2026
दिन : बुधवार
विक्रम संवत् : 2082
अयन : दक्षिणायण
ऋतु : शिशिर
मास : माघ
पक्ष : कृष्ण
तिथि : एकादशी शाम 05:52 बजे तक तत्पश्चात् द्वादशी
नक्षत्र : अनुराधा रात्रि 03:03 बजे जनवरी 15 तक तत्पश्चात् ज्येष्ठा
योग : गण्ड शाम 07:56 बजे तक तत्पश्चात् वृद्धि
करण : बालव शाम 05:52 बजे तक तत्पश्चात कौलव
राहुकाल : दोपहर 12:18 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक
सूर्योदय : प्रातः 06:58 बजे
सूर्यास्त : संध्या 05:35 बजे
दिशा शूल : उत्तर दिशा में
ब्रह्ममुहूर्त : प्रातः 05:09 बजे से प्रातः 06:03 बजे तक
निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:46 बजे से रात्रि 12:40 बजे तक
सूर्य राशि : धनु
चंद्रमा राशि : वृश्चिक
बृहस्पति राशि : मिथुन
व्रत पर्व विवरण : मकर संक्रान्ति, उत्तरायण, षटतिला एकादशी, गण्ड मूल, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग
षट्तिला एकादशी : 13 जनवरी मंगलवार दोपहर 03:17 बजे से 14 जनवरी, बुधवार को शाम 05:52 बजे तक एकादशी है।
विशेष : 14 जनवरी, बुधवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें।
षट्तिला एकादशी के दिन स्नान से पहले उबटन लगाएं। उस उबटन में जौ और तिल पड़ा हो। जौ और तिल डाला पानी पीना, तिल मिश्रित भोजन करना, तिल का दान करना, तिल का होम करना पापनाशक प्रयोग है।
षटतिला एकादशी
षटतिला एकादशी व्रत में तिल का छह रूपों में उपयोग करना उत्तम फलदाई माना जाता है। जो व्यक्ति जितने रूपों में तिल का उपयोग तथा दान करता है, उसे उतने हजार वर्ष तक स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। षटतिला एकादशी पर 6 प्रकार से तिल के उपयोग तथा दान की बात कही है, वह इस प्रकार है:-
तिलस्नायी तिलोद्वार्ती तिलहोमी तिलोद्की।
तिलभुक् तिलदाता च षट्तिला: पापनाशना:।।
अर्थात : इस दिन तिल के जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल मिले जल को पीने, तिल का भोजन तथा तिल का दान करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी के दिन हमें पद्मपुराण के ही एक अंश का श्रवण और ध्यान करना चाहिए। इस दिन काले तिल व काली गाय दान करने का विशेष महत्व है।
उत्तरायण विशेष
जिनके जीवन में अर्थ का अभाव... पैसों की तंगी देखनी पड़ती है। जिनको कोई बहुत परेशान कर रहा है, जिनके शरीर में रोग रहते हैं... बीमारियों से आराम नहीं मिलता है उन सभी के लिए ये योग बहुत सुन्दर है।
क्या करें
सुबह स्नान आदि करके सूर्य भगवन को अर्घ दें, ये 21 मंत्र बोलें, फिर उसके बाद आदित्यहृदय स्त्रोत्र का पाठ करें, जितना हो सके 1/2/3 बार।
ये 21 मंत्र
ॐ सूर्याय नमः
ॐ रवये नमः
ॐ भानवे नमः
ॐ आदित्याय नमः
ॐ मार्तण्डाय नमः
ॐ भास्कराय नमः
ॐ दिनकराय नमः
ॐ दिवाकराय नमः
ॐ मरिचये नमः
ॐ हिरणगर्भाय नमः
ॐ गभस्तिभीः नमः
ॐ तेजस्विनाय नमः
ॐ सहस्त्रकिरणाय नमः
ॐ सहस्त्ररश्मिभिः नमः
ॐ मित्राय नमः
ॐ खगाय नमः
ॐ पूष्णे नमः
ॐ अर्काय नमः
ॐ प्रभाकराय नमः
ॐ कश्यपाय नमः
ॐ श्री सवितृ सूर्य नारायणाय नमः
पौराणिक सूर्य भगवान की स्तुति का मंत्र अर्घ देने से पहले बोले :-
"जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर।।
गाय को कुछ अन्न, हरी सब्जियां और घास आदि अवश्य डाल दें।
आचार्य आदित्य वशिष्ठ
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