दरभंगा राज की आखिरी महारानी कामासुंदरी देवी का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। महाराजा कामेश्वर सिंह की पत्नी और कल्याणी फाउंडेशन की संस्थापिका के निधन से मिथिलांचल में शोक की लहर है। पढ़ें पूरी खबर।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, दरभंगा
बिहार के गौरवशाली इतिहास और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत के एक अध्याय का आज समापन हो गया। दरभंगा राज के अंतिम शासक महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी और रियासत की आखिरी महारानी कामासुंदरी देवी का सोमवार सुबह निधन हो गया। वे 96 वर्ष की थीं और छह माह से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। उन्होंने महाराजा के कल्याणी निवास (दरभंगा) में अपनी अंतिम सांस ली।
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| जवानी के दिनों में महारानी। फाइल फोटो |
महारानी के निधन की सूचना मिलते ही पूरे दरभंगा और शाही परिवार के शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। शाही परिवार के सदस्यों के साथ-साथ कई गणमान्य व्यक्तियों, राजनेताओं और साहित्यकारों ने उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों का कहना है कि महारानी कामासुंदरी देवी केवल एक नाम नहीं, बल्कि मिथिला की परंपराओं और मूल्यों की जीवंत संरक्षक थीं।
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| दरभंगा राज की महारानी फाइल फोटो। |
महारानी कामासुंदरी देवी का जन्म वर्ष 1930 में हुआ था। महाराजा कामेश्वर सिंह ने वर्ष 1940 में उनसे तीसरी शादी की थी। गौरतलब है कि महाराजा की पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी थीं, जिनका निधन वर्ष 1976 में हुआ था, और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया थीं, जिनका निधन वर्ष 1940 में हुआ था। वर्ष 1962 में महाराजा कामेश्वर सिंह के निधन के बाद, महारानी कामासुंदरी देवी ने न केवल शाही गरिमा को संभाला, बल्कि महाराजा की विरासत को आगे बढ़ाने का बीड़ा भी उठाया।
शिक्षा और संस्कृति के प्रति समर्पण : कल्याणी फाउंडेशन
महाराजा की मृत्यु के बाद, महारानी कामासुंदरी देवी ने खुद को सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने महाराजा की स्मृति को जीवंत रखने के लिए 'कल्याणी फाउंडेशन' की स्थापना की। इस फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने जन सरोकार के कार्य कराए।
विशाल पुस्तकालय : महाराजा के नाम पर एक समृद्ध लाइब्रेरी बनाई, जिसमें आज भी दुर्लभ विषयों पर 15,000 से अधिक पुस्तकें सुरक्षित हैं।
सांस्कृतिक प्रोत्साहन : वे लगातार साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रबंधन करती रहीं, जिससे मिथिला की कला और भाषा को बढ़ावा मिला।
धार्मिक संरक्षण : दरभंगा राज से जुड़े मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों की देखरेख में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एक युग का अवसान
जानकारों का मानना है कि महारानी कामासुंदरी देवी का जाना दरभंगा राज के आधिकारिक इतिहास के अंतिम जीवंत सूत्र का टूट जाना है। वे उस दौर की गवाह थीं, जब दरभंगा रियासत अपनी भव्यता और विद्वत्ता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध थी। उनके निधन को मिथिला के सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
अंतिम दर्शन करने को लगा तांता
कल्याणी निवास पर उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। उनका अंतिम संस्कार शाही रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा।



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