Lucknow Heritage : ऐतिहासिक आलमबाग गेट; अतिक्रमण और अवैध पार्किंग से संकट में विरासत

लखनऊ का ऐतिहासिक आलमबाग गेट अपनी खूबसूरती खो रहा है। अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के कारण इस धरोहर की पहचान खतरे में है। जानिए क्या है पूरी स्थिति।

ऐतिहासिक आरामबाग गेट के आस-पास अतिक्रमण और अवैध पार्किंग से धरोहर के संरक्षण पर सवाल।

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ 

नवाबों के शहर लखनऊ की शान कहा जाने वाला आलमबाग गेट आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। 18वीं शताब्दी की यह भव्य वास्तुकला, जो अवध के गौरवशाली इतिहास की गवाह थी। आज बेतरतीब अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के जाल में फंसकर चमक खोती जा रही है।

धरोहर के वजूद पर संकट

आलमबाग गेट के चारों ओर अवैध कब्जा न केवल यातायात को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इस प्राचीन ढांचे को भी नुकसान पहुँचा रहा है। गेट के बिल्कुल पास लगी दुकानें और ठेलों ने इसकी मुख्य दीवारों को ढंक दिया है। विडंबना यह है कि जिस रास्ते से पर्यटक और स्थानीय लोग गुजरते हैं, वहां गंदगी और अव्यवस्था का अंबार लगा रहता है।

पार्किंग बनी बड़ी समस्या

आलमबाग क्षेत्र लखनऊ का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है। पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था न होने के कारण लोग अपने वाहन ऐतिहासिक गेट के ठीक नीचे और आसपास पार्क कर देते हैं।

दोपहिया वाहनों का जमावड़ा : गेट के मेहराबों के नीचे दिन भर बाइक और स्कूटर खड़े रहते हैं।

टैंपो स्टैंड का कब्जा : पास ही अवैध टैंपो स्टैंड होने से गेट का मुख्य दृश्य पूरी तरह ओझल हो जाता है।

ध्वनि और वायु प्रदूषण : वाहनों के भारी दबाव और धुएं से गेट की पुरानी ईंटों और चूने के प्लास्टर पर बुरा असर पड़ रहा है।

इतिहास प्रेमी और पर्यटकों को निराशा

दूर-दराज से आने वाले इतिहास प्रेमी जब आलमबाग गेट पहुँचते हैं, तो उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक साफ फ्रेम मिलना नामुमकिन हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। ऐसे में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी निराश होती है। उनके जेहन में लखनऊ, उत्तर प्रदेश और भारत सरकार की क्या छवि बनती होगी, जो अपने ऐतिहासिक धरोहरों को नहीं संभाल पा रहे हैं।

संरक्षण की दरकार

अगर समय रहते ऐतिहासिक आलमबाग गेट के संरक्षण के लिए कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो लखनऊ अपनी एक और अनमोल विरासत खो देगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और स्थानीय नगर निगम को मिलकर इस क्षेत्र को 'नो पार्किंग ज़ोन' घोषित करा चाहिए। साथ ही अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

आलमबाग गेट ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, संस्कृति का हिस्सा 

आलमबाग गेट केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इसकी खूबसूरती को बहाल करना प्रशासन और नागरिक, दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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