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| प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के साथ हिमांशु। |
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
न्याय की लड़ाई बातों से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और संघर्ष से जीती जाती है। अंबेडकरनगर के सफरुद्दीनपुर गांव का मासूम बच्चा हिमांशु विश्वकर्मा, जो पिछले 54 दिनों से लापता था। यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय की हुंकार के दबाव में आखिरकार पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए उसे बरामद कर लिया है। शनिवार को जब हिमांशु के माता-पिता बच्चे के साथ लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे, तो वहां का माहौल भावुक हो गया। परिजनों ने नम आंखों से यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का आभार व्यक्त किया, जिनके कड़े रुख के कारण प्रशासन हरकत में आया।
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| हिमांशु के परिजनों के साथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय। |
अंबेडकरनगर जिले के सफरुद्दीनपुर गांव का हिमांशु विश्वकर्मा करीब दो महीने पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों ने स्थानीय थाने से लेकर आला अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन पुलिस महकमा पूरी तरह सोया रहा। माता-पिता दर-दर भटकते रहे, पर पुलिस के हाथ खाली थे। 50 दिन बीत जाने के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार की उम्मीदें टूटने लगी थीं।
अजय राय का हस्तक्षेप और 7 दिन का 'अल्टीमेटम'इस मामले की जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने न केवल पीड़ित परिवार से मुलाकात की, बल्कि सड़क पर उतरकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
सड़क पर प्रदर्शन : अजय राय ने स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ हुंकार भरी।
प्रशासन पर दबाव : उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बच्चा जल्द बरामद नहीं हुआ, तो कांग्रेस राज्यव्यापी उग्र आंदोलन करेगी।
दबाव का नतीजा : अजय राय के इस दबाव का असर यह हुआ कि जो प्रशासन 50 दिनों से सुस्त था, सक्रियता दिखाई। महज 7 दिनों के भीतर बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया।
कहां से हुई हिमांशु की बरामदगी
पुलिस की टीम ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों के जाल के जरिए हिमांशु की लोकेशन ट्रेस की। जांच में पता चला कि बच्चा पड़ोसी राज्य के एक इलाके में था (पुलिस जांच के अनुसार)। कड़ी घेराबंदी के बाद पुलिस ने हिमांशु को सुरक्षित मुक्त कराया। अपहरण/लापता होने के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
कांग्रेस मुख्यालय में भावुक दृश्य
आज जब हिमांशु अपने माता-पिता के साथ लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय पहुँचा, तो अजय राय ने बच्चे को गले लगाया। हिमांशु की मां ने रोते हुए कहा कि अगर अजय राय भैया साथ न देते, तो शायद मैं अपने बच्चे को कभी न देख पाती। हमारे लिए वो मसीहा बनकर आए।
न्याय मांगकर नहीं, छीनकर लिया जाता
इस मौके पर अजय राय ने कहा कि न्याय मांगकर नहीं, छीनकर लिया जाता है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति जर्जर है, जहां मासूमों के गायब होने पर भी प्रशासन सोया रहता है। हिमांशु की घर वापसी उन तमाम परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो सिस्टम के सताए हुए हैं।



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