अयोध्या पाटोत्सव के अंतिम दिन अंगद टीला पर स्थित कथा मंच श्रीराम की भक्ति में डूबा भाव-विभोर हुए भक्त
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| व्यास पीठ पर विराजमान जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य। |
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, अयोध्या
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा आयोजित द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव (पाटोत्सव) के पांचवें औऱ अंतिम दिन अंगद टीला के श्रीराम कथा मंच से जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के मंचासीन होते ही श्रीराम लला के चित्र के सामने दीप प्रज्वलन किया। चरण पादुका पूजन के बाद उन्होंने "श्री राम, जय राम, जय-जय राम का जो स्वर शुरू किया पंडाल भक्ति से सराबोर हो गया।
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| आरती में शामिल श्रद्धालु। |
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| श्रीराम कथा का शुभारंभ करते अतिथि। |
जो अपना घर नहीं छोड़ सकता वह जीवन में क्रांति नहीं ला सकता। समाज औऱ राष्ट्र के हित के लिए घर छोड़ कर सुख सुविधाओं का त्याग करना होगा। राम जी ने यही आदर्श प्रस्तुत किया, अयोध्या ने राम को 12 वर्ष की आयु में विश्वामित्र को देकर राम को सम्पूर्ण विश्व का राम बना दिया।
संत श्री ने कहा विश्वामित्र का जब समस्त पुरुषार्थ समाप्त हो गया तब भगवान की ओर देखा, इससे सीखना चाहिए की पहले ही परमात्मा का आशीर्वाद लेकर काम करें तो असफलता नहीं मिलती। राष्ट्र सुरक्षित है तो सब सुरक्षित है। राष्ट्र रक्षा के लिए मांगना पड़े तो इसमें कोई दोष नहीं, इस लिए विश्वामित्र ने प्रभु को मांग लिया। राष्ट्रीय समस्या दूर करने को विश्वामित्र ने अयोध्या की तरफ देखा, अयोध्या हमेशा वैश्विक संकट दूर कर पृथ्वी पर रामत्व की स्थापना करती रही है। विश्वामित्र जैसे प्रबल पुरुषार्थी को अपने अस्त्र शस्त्र के लिए उत्तराधिकारी की जरुरत थी, इसलिए प्रभु की तलाश करते हुए आए। राम को मांगने व दशरथ के मना करने पर भजन "राघव को मैं न दूंगा मुनिनाथ मरते मरते, मेरे प्राण न रहेंगे यह दान करते करते.." सुना कर सभी को विभोर कर दिया।
संत श्री ने कहा राष्ट्रीय संकट के समय सभी साधुओं को एक जुट हो जाना चाहिए, यहाँ भी वशिष्ठ जी ने विश्वामित्र का साथ दिया औऱ दशरथ को राम दान करने को कहा। युवाओं के प्रेरणा स्वरूप राम ने पहला संदेश दे कहा आप बिना भय के यज्ञ करें, संकट की बात हमारे ऊपर छोड़ दें। आज युवा पीढ़ी को बिगड़ने के लिए उनके हाथ में मोबाइल औऱ उसमें अनेक एप दे दिए गए हैं। मारीच औऱ सुबाहु वध की कथा सुनाई और कथा को विश्राम दिया।
अंत में फिजी से आए अमित शर्मा ने "मेरी झोंपडी के भाग्य आज खुल जाएंगे राम आएंगे", "हो दिल में राम नाम की ज्योति जगा देख, आएगा मेरा संवारा दिल से बुल के देख साहित कई भजन प्रस्तुत किए।
मंच पर ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय, राजेंद्र सिंह पंकज, धनंजय पाठक, डॉ. चंद्र गोपाल पाण्डेय, डॉ. अनिल मिश्र, नरेन्द्र, कप्तान केके तिवारी, स्वामी अंकित दास, यजमान नरेश गर्ग, नवल गुप्ता, दीपक त्रिपाठी, अरुणा गोयल, जेपी अरजरिया, ओमप्रकाश राठौर, मुन्नालाल गोयल, प्रणय मुद्दगल, हेमलता राठौर आदि मौजूद रहे। गोपाल जी ने कथा व्यास और उनकी टोली का आभार व्यक्त किया।



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