दिनांक : 28 दिसम्बर 2025
दिन : रविवार
विक्रम संवत् : 2082
अयन :दक्षिणायण
ऋतु : शिशिर
मास : पौष
पक्ष : शुक्ल
तिथि : अष्टमी दोपहर 11:59 तक तत्पश्चात नवमी
नक्षत्र : उत्तरा भाद्रपद सुबह 08:43 बजे तक तत्पश्चात रेवती
योग : वरीयान सुबह 10:13 बजे तक तत्पश्चात परिघ
करण : बव सुबह 11:59 बजे तक तत्पश्चात बालव
राहुकाल : शाम 04:06 बजे से 05:25 बजे तक
सूर्योदय : प्रातः 06:53 बजे
सूर्यास्त : संध्या 05:22 बजे
दिशा शूल : पश्चिम दिशा में
ब्रह्ममुहूर्त : प्रातः 05:00 बजे से प्रातः 05:54 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:36 बजे से रात्रि 12:30 बजे तक
सूर्य राशि : धनु
चंद्रमा राशि : मीन
बृहस्पति राशि : मिथुन
व्रत पर्व विवरण : शाकम्भरी उत्सवारम्भ, मासिक दुर्गाष्टमी, पञ्चक, गण्ड मूल, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग
शिववास : शमसान मे सुबह 11:59 बजे तक
अग्निवास : पाताल मे सुबह 11:59 बजे तक
शाकम्भरी उत्सवारम्भ
यह देवी शाकम्भरी का उत्सव शुरू होने का दिन माना जाता है। नवरात्र की तरह यह भी देवी की उपासना और साधना का समय होता है। इस अवधि में देवी प्रकृति, अन्न और जल की समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। व्रत, पाठ और भक्ति का विशेष महत्व रहता है।
मासिक दुर्गाष्टमी
हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मासिक दुर्गाष्टमी कहा जाता है। इस दिन माता दुर्गा के रूपों की पूजा की जाती है। इस दिन किया गया पाठ और उपवास नवरात्रि जैसी ही शुभता देता है। नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं के निवारण के लिए भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है।
पंचक
जब चंद्रमा धनिष्ठा से रेवती नक्षत्र तक रहता है, उस अवधि को पंचक कहा जाता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग
जब तिथि और वार का विशेष संयोग बनता है, तब इसे सर्वार्थ सिद्धि योग कहा जाता है। इसे शुभ कार्यों, नए काम की शुरुआत, खरीदारी या यात्राओं के लिए अच्छा समय माना जाता है। इस योग में किए गए कार्य सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
रवि योग
जब सूर्य के साथ विशेष नक्षत्र संबंध बनता है, तब रवि योग बनता है। यह योग बाधाओं को दूर करने और सम्मान से जुड़ी बातों के लिए शुभ माना जाता है। नौकरी, इंटरव्यू, सरकारी काम या सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यों के लिए यह समय उपयोगी होता है।
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