Dharm-Aadhyatm : पंचांग एवं व्रत-त्योहार का महात्म्य

10 दिसम्बर 2020, गुरुवार


सूर्योदय 07:06 बजे, सूर्यास्त 17:56 बजे


विक्रम संवत 2077, शक संवत 1942


दक्षिणायन, हेमंत ऋतु, मार्गशीर्ष मास


कृष्ण पक्ष, दशमी तिथि दोपहर 12:51 बजे तक तत्पश्चात एकादशी


हस्त नक्षत्र सुबह 10:51 बजे तक तत्पश्चात चित्रा


सौभाग्य योग रात्रि 07:26 बजे तक तत्पश्चात शोभन


राहुकाल दोपहर 01:53 बजे से शाम 03:15 बजे तक


दिशाशूल : दक्षिण दिशा में


पंचक


19 दिसंबर प्रातः 7.16 बजे से 23 दिसंबर तड़के 4.32 बजे तक


व्रत पर्व विवरण - उत्पत्ति एकादशी, जो गुरुवार दोपहर 12:52 बजे से 11 दिसम्बर, शुक्रवार सुबह 10:04 बजे तक है।


विशेष : 11 दिसम्बर, शुक्रवार को एकादशी का व्रत रखें। एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है, जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है। जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है। एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं। इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है। धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है। कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है। परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है। पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि ने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है। एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है।


एकादशी के दिन करने योग्य


एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें। विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो 10 माला गुरुमंत्र का जप कर लें। अगर घर में झगड़े होते हों, तो झगड़े शांत हों जाएं ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे।


एकादशी के दिन यह सावधानी बरतें


महीने में 15-15 दिन में एकादशी आती है। एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए। एकादशी के दिन जो चावल खाता है, उसे एक-एक चावल खाने का एक-एक कीड़ा खाने के समान पाप लगता है। ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा है।


त्रिस्पृशा का महायोग


त्रिस्पृशा का महायोग : हजार एकादशी का फल देनेवाला व्रत। एक त्रिस्पृशा एकादशी के उपवास से एक हजार एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है। इस एकादशी को रात में जागरण करनेवाला भगवान विष्णु के स्वरूप में लीन हो जाता है।


पद्म पुराण में आता है कि देवर्षि नारदजी ने भगवान शिवजी से कहा : सर्वेश्वर ! आप त्रिस्पृशा नामक व्रत का वर्णन कीजिए, जिसे सुनकर लोग कर्मबंधन से मुक्त हो जाते हैं। महादेवजी : ‘‘विद्वान् ! देवाधिदेव भगवान ने मोक्षप्राप्ति के लिए इस व्रत की सृष्टि की है, इसीलिए इसे ‘वैष्णवी तिथि कहते हैं।


भगवान माधव ने गंगाजी के पापमुक्ति के बारे में पूछने पर बताया था : जब एक ही दिन एकादशी, द्वादशी तथा रात्रि के अंतिम प्रहर में त्रयोदशी भी हो तो उसे ‘त्रिस्पृशा' समझना चाहिए। यह तिथि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देनेवाली तथा सौ करोड तीर्थों से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। यह व्रत सम्पूर्ण पाप-राशियों का शमन करनेवाला, महान दुःखों का विनाशक और सम्पूर्ण कामनाओं का दाता है। इस त्रिस्पृशा के उपवास से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।


हजार अश्वमेघ और सौ वाजपेय यज्ञों का फल मिलता है। यह व्रत करनेवाला पुरुष पितृ कुल, मातृ कुल तथा पत्नी कुल के सहित विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है । इस दिन द्वादशाक्षर मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करना चाहिए । जिसने इसका व्रत कर लिया उसने सम्पूर्ण व्रतों का अनुष्ठान कर लिया।


दिसंबर में व्रत-त्योहार


दिसंबर 2020 त्योहार

3 गुरुवार संकष्टी चतुर्थी

11 शुक्रवार उत्पन्ना एकादशी

12 शनिवार प्रदोष व्रत (कृष्ण)

13 रविवार मासिक शिवरात्रि

14 सोमवार मार्गशीर्ष अमावस्या

15 मंगलवार धनु संक्रांति

25 शुक्रवार मोक्षदा एकादशी

27 रविवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)

30 बुधवार मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत


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