Big News : कानपुर बिकरू कांड के दोषी डीआईजी पीएसी अनंत देव निलंबित

  • एसआईटी की रिपोर्ट के बाद दोषियों पर शासन ने शुरू की कार्रवाई
  • एसएसपी दिनेश पी को नोटिस, एएसपी देहात पर भी होगी कार्रवाई

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ



कानपुर जिले के चर्चित बिकरू कांड में अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद खलबली मच गई है। पुलिस एवं प्रशासिनक महकमे के तेजतर्रार अफसर भी दोषी पाए गए हैं। अब शासन ने भी एक्शन मोड में आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जांच रिपोर्ट में दोषी कानपुर के तत्कालीन एसएसपी एवं मुरादाबाद में पीएसी के डीआईजी अनंत देव तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। उस दौरान कानपुर के एसएसपी रहे दिनेश पी को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। कानपुर के तत्कालीन एएसपी देहात प्रदुमन सिंह के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रकरण में जल्द ही अन्य दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। एसआईटी की जांच रिपोर्ट में 80 अधिकारी एवं कर्मचारी दोषी पाए गए हैं। इनमें पुलिस के अलावा जिला प्रशासन, राजस्व, आबकारी व आपूर्ति विभाग से हैं।



कानपुर के तत्कालीन एसएसपी अनंत देव वर्तमान में डीआइजी पीएसी सेक्टर, मुरादाबाद के पद पर तैनात थे। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि बिकरू कांड के मुख्य आरोपी कुख्यात विकास दुबे पर स्थानीय पुलिस व प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी कृपा बरसाते रहे। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की सांठगाठ एवं अनदेखी की वजह से ही दुर्दात विकास दुबे का साम्राज्य बढ़ता चला गया। समय रहते उसके खिलाफ कभी भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। एसआईटी की रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने पूरे प्रकरण में दोषी पाए गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।


एसआईटी की जांच रिपोर्ट में कानपुर के तत्कालीन सीओ एलआइयू के अलावा लखनऊ के तत्कालीन सीओ सरोजनीनगर व कृष्णानगर कोतवाली प्रभारी समेत अन्य पुलिसकर्मियों को भी दोषी पाया गया है। जांच में सामने आया था कि एसटीएफ ने वर्ष 2017 में जब विकास दुबे को लखनऊ के कृष्णानगर स्थित आवास से उसके भाई दीपक दुबे के नाम दर्ज आटोमेटिक रायफल के साथ गिरफ्तार किया था। तब लखनऊ व कानपुर पुलिस की लापरवाही से ही वह रायफल कोर्ट से दीपक दुबे के नाम रिलीज हो गई थी। बिकरू कांड में इस असलहे का उपयोग भी किया गया। एसआईटी ने करीब 3200 पन्नों की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी है। इनमें करीब 700 पन्ने मुख्य हैं, जिनमें दोषी पाए गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका के अलावा करीब 36 संस्तुतियां भी हैं। पुलिस सुधार को लेकर भी कई अहम बातें एवं सुझाव दिए गए हैं।


जानें पूरा प्रकरण


कानपुर के बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 की रात दुर्दांत विकास दुबे एवं उसके गुर्गों ने मिलकर सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। बिकरू गांव में पुलिस टीम हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकडऩे गई थी, लेकिन दबिश की सूचना विकास दुबे को पहले ही मिल गई थी। उसने योजना बनाकर पुलिसकर्मियों को घेर लिया था। छतों से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं थीं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल के दर्शन के दौरान उसे गिरफ्तार किया गया था। वहां से लाने के दौरान यूपी एसटीएफ ने दुर्दांत विकास दुबे को 10 जुलाई को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया था। शासन ने मुठभेड़ के अगले दिन ही 11 जुलाई को एसआईटी गठित कर नौ बिंदुओं पर जांच सौंपी थी। एसअाईटी में एडीजी हरिराम शर्मा एवं डीआइजी जे. रवींद्र गौड शामिल किए गए थे।

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