जब से सरकार ने आंवले को एक जिला-एक उत्पाद (ओडी-ओपी) के रूप में चुना है, तब से उत्पादों का प्रचार-प्रसार और तेज हो गया है। लॉकडाउन हटने के बाद से आंवला फैक्ट्रियों में उत्पादन तो शुरू हुआ, लेकिन ऑडर नहीं मिल रहे हैं। खरीदारी की रफ्तार तेज नहीं हुई है। इसलिए अब विदेशी कैंडी के मुकाबले आंवला कैडी को तैयार किया गया है। इसके लिए प्रयास भी शुरू हो गए हैं। इसका असर भी दिखने लगा है। आंवला कारोबारी लोखंडवाला कहते हैं कि आंवला की कैंडी की डिमांड बढ़ने लगी है। साल में करीब 300 टन आंवले के उत्पाद की खपत है। साल भर में ₹30 करोड़ से अधिक का व्यापार होता है। अगर विदेशी फ्रूट जूस और कैंडी की बिक्री में कमी जारी रही तो निश्चित रूप से उद्यमियों को इसका फायदा मिलेगा।

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