Iran War Update ईरान संकट के बीच UNSC में होर्मुज स्ट्रेट खोलने का प्रस्ताव चीन और रूस के वीटो के कारण गिर गया। जानें बहरीन द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान क्या हुआ। Strait Of Hormuz.
प्रारब्ध न्यूज डेस्क, लखनऊ
Middle East Crisis मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध की आहट के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव गिर गया है। विश्व व्यापार के लिए लाइफलाइन मानी जाने वाली होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खुला रखने के लिए लाए गए प्रस्ताव को चीन और रूस ने वीटो (Veto) कर दिया।
यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के लिए तय की गई समय सीमा (डेडलाइन) से ठीक पहले हुआ है, जिससे क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका और गहरा गई है।
प्रस्ताव की मुख्य बातें: क्यों हुआ विवाद
बहरीन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग (होर्मुज स्ट्रेट) में व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना था। मीडिया रिपोर्ट्स और 'अल जजीरा' के मुताबिक, इस प्रस्ताव की मुख्य विशेषताएं ये रहीं।
कोई सैन्य कार्रवाई नहीं : प्रस्ताव में किसी भी प्रकार के सैन्य हस्तक्षेप का जिक्र नहीं था, बल्कि कूटनीतिक और कानूनी माध्यमों से जलडमरूमध्य को खुला रखने की बात कही गई थी।
छह बार हुआ बदलाव : पिछले दो हफ्तों में इस ड्राफ्ट को 6 बार बदला गया ताकि अधिक से अधिक देशों की सहमति प्राप्त की जा सके।
मतदान का समीकरण : प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट पड़े, लेकिन स्थायी सदस्य होने के नाते रूस और चीन के वीटो ने इसे खारिज कर दिया।
तटस्थ देश : इस महत्वपूर्ण वोटिंग के दौरान पाकिस्तान और कोलंबिया ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया (Abstain)।
ट्रंप की 'डेडलाइन' और बढ़ता दबाव
यह वोटिंग ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिकी समय अनुसार रात 8 बजे की समय सीमा तय की थी। इस वीटो के बाद अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जानकारों का मानना है कि रूस और चीन का यह कदम ईरान के साथ उनके रणनीतिक संबंधों और अमेरिका के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिश है।
होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) का महत्व
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। इसकी अहमियत को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है।
वैश्विक तेल आपूर्ति : दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
रणनीतिक स्थान : यह ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी के बीच स्थित है, जो सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे तेल उत्पादकों के लिए एकमात्र समुद्री निकास है।
ईरान का नियंत्रण : इस क्षेत्र पर ईरान का भौगोलिक प्रभाव है, और वह अक्सर तनाव के समय इसे बंद करने की चेतावनी देता रहा है।
रूस-चीन ने खुलकर ईरान के हितों का किया बचाव
UNSC में इस प्रस्ताव के फेल होने के बाद अब गेंद फिर से अमेरिका और इजरायल के पाले में है। जहां एक तरफ डिप्लोमेसी के रास्ते बंद होते दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रूस और चीन ने खुलकर ईरान के हितों का बचाव किया है। यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा कीमतों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।
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