Kidney Transplant Racket UP : कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच में बड़े खुलासे। मास्टरमाइंड डॉ. रोहित के नेटवर्क में प्रयागराज का नवीन पांडे शामिल। पुलिस की टीमें वाराणसी और चित्रकूट रवाना।
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाले किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके तार प्रदेश के कई बड़े जिलों से जुड़ते जा रहे हैं। कानपुर से शुरू हुई जांच की तपिश अब चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी तक पहुँच गई है। पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस मेडिकल सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए अपनी सक्रियता तेज कर दी है।
डॉ. रोहित और नवीन पांडेय का कनेक्शन
जांच एजेंसियों की रडार पर अब प्रयागराज के एक निजी अस्पताल में कार्यरत नवीन पांडे है। सूत्रों के मुताबिक, नवीन पिछले चार वर्षों से इस गिरोह के मास्टरमाइंड डॉ. रोहित की कोर टीम का हिस्सा बनकर काम कर रहा था। नवीन की भूमिका मुख्य रूप से डोनर्स की पहचान करने और कागजी हेरफेर करने में संदिग्ध मानी जा रही है।
डिजिटल डेटा से खुले राज
गिरफ्तार आरोपी शिवम अग्रवाल के मोबाइल फोन से रिकवर किए गए डेटा ने इस पूरे सिंडिकेट की कार्यप्रणाली को बेनकाब कर दिया है। शिवम के फोन में मौजूद कॉल रिकॉर्ड्स और चैट्स से यह स्पष्ट हुआ है कि यह नेटवर्क केवल एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे पूर्वांचल और बुंदेलखंड में फैला हुआ था।
ऑपरेशन 'क्लीन स्वीप': चित्रकूट व वाराणसी में छापेमारी
पुलिस की विशेष टीमों ने इस मामले में दो महत्वपूर्ण दिशाओं में कार्रवाई तेज की है।
वाराणसी : यहाँ संदिग्धों की तलाश में छापेमारी जारी है, जहाँ से डोनर्स और ग्राहकों के बीच कड़ी जोड़ने की सूचना मिली है।
चित्रकूट : शहर के एक ओटी (OT) टेक्नीशियन की लोकेशन चित्रकूट में ट्रेस होने के बाद जांच का दायरा और गहरा हो गया है। पुलिस को संदेह है कि सुरक्षित ठिकानों के लिए अपराधी इन क्षेत्रों का उपयोग कर रहे हैं।
जांच की वर्तमान स्थिति
"फिलहाल 3 से 4 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अगले 48 घंटों के भीतर मेडिकल जगत के कुछ बड़े नामों का खुलासा होने की प्रबल संभावना है।" - जांच अधिकारी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल
इस रैकेट के उजागर होने से चिकित्सा क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। यह मामला न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि सरकारी और निजी अस्पतालों की निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। कैसे सालों तक एक इतना बड़ा सिंडिकेट स्वास्थ्य विभाग की आंखों में धूल झोंककर मासूमों की किडनी का सौदा करता रहा, यह अब सबसे बड़ा जांच का विषय है।

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