दिनांक : 02 अप्रैल 2026
दिन : बृहस्पतिवार
विक्रम संवत् : 2083
अयन : उत्तरायण
ऋतु : वसंत
मास : चैत्र
पक्ष : शुक्ल
तिथि : पूर्णिमा प्रातः 07:41 बजे तक तत्पश्चात प्रतिपदा
नक्षत्र : हस्त शाम 05:38 बजे तक तत्पश्चात चित्रा
योग : ध्रुव दोपहर 02:20 बजे तक तत्पश्चात व्याघात
करण : बव प्रातः 07:41 बजे तक तत्पश्चात बालव
राहुकाल : दोपहर 01:46 बजे से दोपहर 03:19 बजे तक
सूर्योदय : प्रातः 06:02 बजे
सूर्यास्त : संध्या 06:24 बजे
दिशा शूल : दक्षिण दिशा में
ब्रह्ममुहूर्त : प्रातः 04:29 बजे से प्रातः 05:15 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:49 बजे से रात्रि 12:36 बजे तक
सूर्य राशि : मीन
चंद्रमा राशि : कन्या
बृहस्पति राशि : मिथुन
व्रत पर्व विवरण : हनुमान जन्मोत्सव, चैत्र पूर्णिमा
हनुमान जन्मोत्सव आज यानी गुरुवार, 02 अप्रैल 2026
धर्म ग्रंथों में हनुमानजी के 12 नाम बताए गए हैं, जिनके द्वारा उनकी स्तुति की जाती है। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीहनुमान अंक के अनुसार हनुमानजी के इन 12 नामों का जो रात में सोने से पहले व सुबह उठने पर अथवा यात्रा प्रारंभ करने से पहले पाठ करता है, उसके सभी भय दूर हो जाते हैं। ऐसे जातक अपने जीवन में सभी सुख प्राप्त करते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में अनेक उपलब्धियां प्राप्त करता है।
हनुमानजी की 12 नामों वाली स्तुति इस प्रकार है।
हनुमान अंजनीसूनुर्वायुपुत्रों महाबल:।
रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिंगाक्षोअमितविक्रम:।।
उदधिक्रमणश्चेव सीताशोकविनाशन:।
लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।।
एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:।
स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य: पठेत्।।
तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।
राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन।।
इन 12 नामों से होती है, हनुमानजी की स्तुति। इसलिए जानिए इनकी महिमा :-
हनुमान :
हनुमानजी का यह नाम इसलिए पड़ा, क्योंकि एक बार क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने इनके ऊपर अपने वज्र का प्रहार किया था, जो सीधे उनकी ठोड़ी (हनु) पर लगा। हनु पर वज्र का प्रहार होने के कारण ही इनका नाम हनुमान पड़ा।
लक्ष्मणप्राणदाता :
जब रावण के पुत्र इंद्रजीत ने शक्ति का उपयोग कर लक्ष्मण को बेहोश कर दिया था, तब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर आए थे। उसी बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण को होश आया था। इसलिए हनुमानजी को लक्ष्मणप्राणदाता भी कहा जाता है।
दशग्रीवदर्पहा :
दशग्रीव यानी रावण और दर्पहा यानी घमंड तोड़ने वाला। हनुमानजी ने लंका जाकर सीता माता का पता लगाया और रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध करके लंका में आग भी लगा दी। इस प्रकार हनुमानजी ने कई बार रावण का घमंड तोड़ा था। इसलिए उनका एक नाम ये भी प्रसिद्ध है ।
रामेष्ट :
हनुमान भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं। धर्म ग्रंथों में अनेक स्थानों पर वर्णन मिलता है कि श्रीराम ने हनुमान को अपना प्रिय माना है। भगवान श्रीराम को प्रिय होने के कारण ही इनका एक नाम रामेष्ट भी है।
फाल्गुनसख :
महाभारत के अनुसार, पांडु पुत्र अर्जुन का एक नाम फाल्गुन भी है। युद्ध के समय हनुमानजी अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजित थे। इस प्रकार उन्होंने अर्जुन की सहायता की। सहायता करने के कारण ही उन्हें अर्जुन का मित्र कहा गया है। फाल्गुन सख का अर्थ है अर्जुन का मित्र।
पिंगाक्ष :
पिंगाक्ष का अर्थ है भूरी आंखों वाला। अनेक धर्म ग्रंथों में हनुमानजी का वर्णन किया गया है। उसमें हनुमानजी को भूरी आंखों वाला बताया है। इसलिए इनका एक नाम पिंगाक्ष भी है।
अमितविक्रम :
विक्रम का अर्थ है पराक्रमी और अमित का अर्थ है बहुत अधिक। हनुमानजी ने अपने पराक्रम के बल पर ऐसे बहुत से कार्य किए, जिन्हें करना देवताओं के लिए भी कठिन था। इसलिए इन्हें अमितविक्रम भी कहा जाता है।
उदधिक्रमण :
उदधिक्रमण का अर्थ है समुद्र का अतिक्रमण करने वाले यानी लांधने वाला । सीता माता की खोज करते समय हनुमानजी ने समुद्र को लांघा था।इसलिए उनका एक नाम ये भी है ।
अंजनीसुत :
माता अंजनी के पुत्र होने के कारण ही हनुमानजी का एक नाम अंजनीसुत भी प्रसिद्ध है।
वायुपुत्र :
हनुमानजी का एक नाम वायुपुत्र भी है। पवनदेव के पुत्र होने के कारण ही इन्हें वायुपुत्र भी कहा जाता है ।
महाबल :
हनुमानजी के बल की कोई सीमा नहीं हैं । इसलिए इनका एक नाम महाबल भी है ।
सीता शोक विनाशन
माता सीता के शोक का निवारण करने के कारण हनुमानजी का ये नाम पड़ा।
आचार्य आदित्य वशिष्ठ
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