Kanpur Tiles Market: गुजरात के मोरबी में फैक्ट्रियां बंद होने से कानपुर टाइल्स मार्केट पर संकट, 25 दिनों से सप्लाई ठप

Kanpur Trade गुजरात के मोरबी में गैस संकट के कारण टाइल्स फैक्ट्रियां बंद होने से कानपुर में सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है। जानें कैसे इस संकट ने 10 हजार मजदूरों और 15 करोड़ रुपये के दैनिक कारोबार को प्रभावित किया है।

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कानपुर

Kanpur News गुजरात के मोरबी में गहराए गैस संकट ने उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर के टाइल्स और मार्बल बाजार की कमर तोड़ दी है। पिछले 25 दिनों से मोरबी से माल की एक भी खेप कानपुर नहीं पहुंची है, जिसके कारण शहर का 15 करोड़ का दैनिक कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सप्लाई रुकने से न केवल टाइल्स की कीमतों में भारी उछाल आया है, बल्कि इस क्षेत्र से जुड़े हजारों मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

मुख्य बिंदु: संकट की पूरी तस्वीर

सप्लाई चेन प्रभावित : मोरबी की फैक्ट्रियां गैस की अनुपलब्धता के कारण बंद हैं, जिससे नया माल आना बंद हो गया है।

कीमतों में उछाल : जो टाइल्स पहले ₹200 में उपलब्ध थे, उनकी कीमत अब ₹250 से ₹275 तक पहुंच गई है।

बेरोजगारी का डर : प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लगभग 10,000 कर्मचारियों और मजदूरों की रोजी-रोटी पर खतरा।

ठप पड़ा ट्रांसपोर्ट : माल न आने से लोडिंग-अनलोडिंग और ट्रांसपोर्टेशन का काम पूरी तरह बंद है।

गैस संकट और फैक्ट्रियों की तालाबंदी

मोरबी, जो देश का सबसे बड़ा टाइल्स हब है, पूरी तरह गैस आपूर्ति पर निर्भर है। वर्तमान में गैस की कमी और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते वहां की सैकड़ों इकाइयां बंद पड़ी हैं। कानपुर के व्यापारियों के अनुसार, गर्मी का सीजन टाइल्स कारोबार के लिए 'पीक टाइम' होता है, लेकिन स्टॉक की कमी ने बाजार की रौनक छीन ली है।

कानपुर के इन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर

शहर में टाइल्स और मार्बल का मुख्य केंद्र किदवईनगर है, जहां 100 से अधिक बड़े शोरूम हैं। 

शहर के अन्य हिस्सों में स्थित 150+ दुकानें।

कानपुर से सटे आसपास के जिलों की आपूर्ति श्रृंखला।

पुराने स्टॉक के भरोसे चल रहे छोटे रिटेलर्स।

व्यापारिक संगठनों की प्रतिक्रिया

कानपुर मार्बल एंड टाइल्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

"मोरबी की फैक्ट्रियां बंद होने से कानपुर में आपूर्ति शून्य हो गई है। कीमतें बढ़ने से आम ग्राहक बाजार से गायब हैं, जिससे पूरा इकोसिस्टम प्रभावित हो रहा है।" - हिमांशु पाल, महामंत्री, कानपुर मार्बल एंड टाइल्स एसोसिएशन।

"इस कारोबार से लगभग 10 हजार लोग जुड़े हैं। काम न होने से दिहाड़ी मजदूरों और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।" - संजय जैन, उपाध्यक्ष, कानपुर मार्बल एंड टाइल्स एसोसिएशन।

"कानपुर में टाइल, ग्रेनाइट और मार्बल का कुल टर्नओवर ₹10-15 करोड़ प्रतिदिन है। अंतरराष्ट्रीय तनावों (ईरान-अमेरिका स्थिति) का असर भी अप्रत्यक्ष रूप से ईंधन और गैस की कीमतों पर पड़ रहा है, जिसे जल्द सुलझना चाहिए।" - जितेंद्र त्रिवेदी, प्रवक्ता, कानपुर मार्बल एंड टाइल्स एसोसिएशन।

कठिन दौर से गुजर रहा कानपुर का टाइल्स उद्योग

कानपुर का टाइल्स उद्योग वर्तमान में अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। यदि मोरबी में गैस संकट जल्द हल नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे निर्माण कार्य करा रहे आम नागरिकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।

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