स्मार्टफोन निर्यात में भारत का उदय: 'असेंबल इन इंडिया' से 'मेक इन इंडिया' तक का सफर

प्रारब्ध न्यूज़ ब्यूरो, लखनऊ 

​कुछ साल पहले तक भारत स्मार्टफोन का एक बड़ा आयातक (Importer) हुआ करता था, लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। साल 2025-26 के आंकड़ों को देखें, तो भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बनकर उभरा है। अब हमारे हाथों में मौजूद फोन सिर्फ भारत में ही नहीं बिक रहे, बल्कि पूरी दुनिया में यहां से भेजे जा रहे हैं।

​📈 आंकड़ों की जुबानी: एक बड़ी छलांग

​भारत का स्मार्टफोन निर्यात अब केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक आर्थिक शक्ति का प्रतीक बन गया है:

  • नया रिकॉर्ड : वर्ष 2025 में भारत का स्मार्टफोन निर्यात $30 बिलियन (लगभग ₹2.63 लाख करोड़) के पार पहुंच गया है।
  • नंबर 1 एक्सपोर्ट आइटम : स्मार्टफोन अब भारत की निर्यात सूची में डीजल और हीरे जैसे पारंपरिक उत्पादों को पीछे छोड़कर सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया है।
  • चीन को पीछे छोड़ा : वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में, भारत अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात करने के मामले में चीन को पछाड़कर शीर्ष पर पहुंच गया।

​🚀 इस सफलता के पीछे के 3 मुख्य कारण

1. PLI स्कीम (Production Linked Incentive) :

भारत सरकार की पीएलआई योजना ने गेम चेंजर की भूमिका निभाई है। कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए मिलने वाली वित्तीय छूट ने विदेशी दिग्गजों को यहाँ कारखाने लगाने के लिए प्रेरित किया है। अब सरकार PLI 2.0 की तैयारी कर रही है, जिससे इस क्षेत्र को और गति मिलेगी।

2. दिग्गजों का भरोसा (Apple और Samsung):

  • Apple : आज दुनिया भर के हर 4 में से 1 आईफोन भारत में बन रहा है। अकेले Apple ने 2025 में भारत से $22 बिलियन से अधिक मूल्य के फोन निर्यात किए हैं।
  • Samsung : नोएडा में स्थित सैमसंग की दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री वैश्विक मांग को पूरा करने में अहम योगदान दे रही है।

3. सप्लाई चेन का स्थानांतरण :

'चीन प्लस वन' रणनीति के तहत दुनिया की बड़ी कंपनियां चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं। भारत ने अपनी बेहतर नीतियों और स्किल्ड लेबर के दम पर खुद को एक सुरक्षित और मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया है।

​🌍 वैश्विक बाजार में भारत का दबदबा

​वर्तमान में भारत से निर्यात होने वाले स्मार्टफोन मुख्य रूप से अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड और यूके जैसे विकसित देशों में जा रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की गुणवत्ता अब अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतर रही है।

​भविष्य की राह : क्या है अगला कदम

​स्मार्टफोन में मिली इस सफलता के बाद अब भारत का लक्ष्य केवल फोन को 'असेंबल' करना नहीं, बल्कि उनके कलपुर्जों (Components) का निर्माण भी यहीं करना है। डिस्प्ले, चिपसेट और बैटरी जैसे कीमती पार्ट्स का उत्पादन भारत में शुरू होने से वैल्यू एडिशन और बढ़ेगा।


आत्मनिर्भर भारत' के सपने का हकीकत में बदलना 

स्मार्टफोन निर्यात में भारत का यह दबदबा केवल आर्थिक विकास नहीं है, बल्कि यह 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने का हकीकत में बदलना है। अगर यही रफ्तार रही, तो वो दिन दूर नहीं जब दुनिया के हर कोने में बजने वाला फोन "मेड इन इंडिया" होगा।


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