यूपी के नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने लखनऊ में विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने डीपीआर लंबित रखने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
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| समीक्षा बैठक में नगर विकास मंत्री एके शर्मा। |
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| समीक्षा बैठक में मंत्री व अधिकारी। |
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने जनहित की योजनाओं में देरी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना ली है। रविवार को लखनऊ स्थित संगम सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट में स्वीकृत योजनाओं के क्रियान्वयन में शिथिलता बरतने वाले अधिशासी अधिकारियों (EO) और परियोजना अधिकारियों (PO, डूडा) को बख्शा नहीं जाएगा।
लापरवाही पर 'शून्य सहनशीलता' की नीति
मंत्री एके शर्मा ने योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता आम जनता को नगरीय सुविधाओं का लाभ शीघ्रता से पहुंचाना है। उन्होंने निर्देशित किया कि जिन अधिकारियों ने स्वीकृत योजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) समय से शासन को नहीं भेजी है, उनके विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। कार्यों में अनावश्यक विलंब व लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
इन प्रमुख योजनाओं की विस्तृत समीक्षा
बैठक में विभाग की प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं की वर्तमान स्थिति और वित्तीय प्रगति पर चर्चा की गई। उनमें से प्रमुख योजनाओं में पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना, मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना, वंदन योजना एवं पेयजल योजना, कान्हा गौशाला व उपवन योजना, आदर्श नगर पालिका योजना हैं।
"नगरीय विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। अधिकारी पूर्ण जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें ताकि शहरों में बुनियादी ढांचा सुदृढ़ हो सके।" - एके शर्मा, नगर विकास मंत्री, उत्तर प्रदेश।
गुणवत्ता व पारदर्शिता संग मॉनिटरिंग के निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों को केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने इन बिंदुओं पर जोर दिया है।
नियमित मॉनिटरिंग : सभी परियोजनाओं की जमीनी स्तर पर निगरानी की जाए। उनमें आने वाली सभी तरह की बाधाओं का त्वरित समाधान निकाला जाए।
फीडबैक प्रणाली : योजनाओं की प्रभावशीलता जानने के लिए आम जनता से सीधा फीडबैक लिया जाए।
जवाबदेही : प्रत्येक परियोजना के लिए समयसीमा (Deadline) निर्धारित की जाए और गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही, जिनमें नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद, सचिव रविंद्र कुमार, विशेष सचिव सत्य प्रकाश पटेल एवं विभिन्न निकायों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री के कड़े रुख से विभाग में हड़कंप
मंत्री एके शर्मा के इस कड़े रुख से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। लंबित डीपीआर को प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देशों के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि बजट में स्वीकृत योजनाएं धरातल पर तेजी से उतरेंगी।



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