लखनऊ के द लिली विला में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में साहित्य और राष्ट्रभक्ति का संगम दिखा। कालीचरण महाराज के सानिध्य और डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की उपस्थिति में कवियों ने बांधा समां।
लखनऊ में भव्य कवि सम्मेलन : कालीचरण महाराज के सानिध्य में गूंजा राष्ट्रभाव, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक समेत कई दिग्गज रहे मौजूद
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
राजधानी के 'द लिली विला' (The Lilli Villas) में मंगलवार की शाम साहित्य और राष्ट्रभक्ति के नाम रही। The Lilli Helping Hands Trust एवं आराधन परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'भव्य कवि सम्मेलन' ने न केवल श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि सामाजिक एकजुटता का एक सशक्त संदेश भी दिया।
संत सानिध्य और राजनीतिक दिग्गजों की उपस्थिति
यह गरिमामयी आयोजन पूज्य कालीचरण महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के कद्दावर नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने शिरकत कर कवियों का उत्साहवर्धन किया।
मुख्य अतिथियों में ये रहे शामिल
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह रहे। इसके अतिरिक्त, कई माननीय सांसद एवं विधायकों ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
काव्य पाठ में दिखा राष्ट्रप्रेम का जज्बा
देश और प्रदेश के ख्यातिलब्ध कवियों ने अपनी ओजस्वी और भावपूर्ण रचनाओं से वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। कविता के माध्यम से साहित्य और संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया गया। उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ रचनाओं का स्वागत किया।
सर्वसमाज की सहभागिता: एकता की मिसाल
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता विभिन्न समाजों के गणमान्य व्यक्तियों की सक्रिय भागीदारी रही, जो सामाजिक समरसता का प्रतीक बनी। प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
समाज : प्रमुख व्यक्ति
सिंधी समाज : नानक चंद
सिख समाज : निर्मल सिंह, हरपाल सिंह जग्गी, परविंदर सिंह
पंजाबी समाज ; अनिल वर्मानी।
एक ऐतिहासिक पहल
आयोजकों के अनुसार, बड़ी संख्या में आए साहित्य प्रेमियों और बुद्धिजीवियों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह कवि सम्मेलन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम मात्र नहीं था, बल्कि राष्ट्रभक्ति के प्रचार-प्रसार और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।
शब्दों की शक्ति व सुरों के संगम
मंगलवार सायं 6 बजे से शुरू हुआ यह सिलसिला देर रात तक चला, जहाँ शब्दों की शक्ति और सुरों के संगम ने लखनऊ की शाम को यादगार बना दिया।





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