West Bengal Assembly Election:पश्चिम बंगाल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव लड़ने पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने खुद को पार्टी का फौजी बताते हुए कहा कि वे आलाकमान के हर आदेश के लिए तैयार हैं। जानें पूरी खबर।
अधीर रंजन चौधरी का बड़ा बयान : "मैं कांग्रेस का फौजी हूँ, जहाँ से आदेश मिलेगा वहीं से चुनाव लड़ूँगा"
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कोलकाता
Adhir Ranjan Chowdhury : पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'बहरामपुर के रॉबिनहुड' कहे जाने वाले अधीर रंजन चौधरी ने एक बार फिर अपने तेवरों से विरोधियों को कड़ा संदेश दिया है। हाल ही में मीडिया से बात करते हुए चौधरी ने स्पष्ट किया कि वे चुनावी मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और पार्टी का जो भी निर्णय होगा, उन्हें मंजूर होगा।
रणनीति व पार्टी के प्रति निष्ठा स्पष्ट : अधीर
पश्चिम बंगाल कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने आगामी चुनावों को लेकर अपनी रणनीति और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा स्पष्ट कर दी है। उनके हालिया बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
"पार्टी का फौजी हूँ": अनुशासन और निष्ठा का संदेश
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "मैं कांग्रेस पार्टी का एक फौजी हूँ। पार्टी हाईकमान मुझे जहाँ से भी चुनाव लड़ने के लिए कहेगा, मैं वहीं से मैदान में उतरूँगा।" उनका यह बयान उन अटकलों पर विराम लगाता है जिनमें उनके चुनाव लड़ने या न लड़ने को लेकर संशय जताया जा रहा था। उन्होंने साफ कर दिया कि वे एक अनुशासित सिपाही की तरह पार्टी के हर आदेश का पालन करेंगे।
वरिष्ठ नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी
चौधरी ने जानकारी दी कि कांग्रेस आलाकमान ने इस बार रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी के भीतर सभी वरिष्ठ नेताओं को चुनाव लड़ने की सलाह दी गई है।
एकजुटता पर जोर : सभी नेताओं को मिलकर चुनाव लड़ने और संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
टिकट वितरण : जिसे जहाँ से टिकट दिया जाएगा, वह वहीं से चुनाव लड़ेगा। इसमें किसी भी प्रकार की गुटबाजी की जगह नहीं होगी।
युद्धस्तर पर तैयारी : चुनावों के लिए तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की कोशिश की जा रही है।
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की राह
अधीर रंजन चौधरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बंगाल में कांग्रेस अपने अस्तित्व और जनाधार को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही है। वरिष्ठ नेताओं के मैदान में उतरने से न केवल जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि चुनावी मुकाबला भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।

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