लखनऊ में 'वंदेमातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने पर आकाशवाणी और भातखण्डे विश्वविद्यालय ने "उत्सव वंदेमातरम्" का आयोजन किया। जानें आल्हा गायन, आनंदमठ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का पूरा विवरण।
![]() |
| दीप प्रज्ज्वलित करते मुख्य अतिथि आशुतोष पांडेय, पुलिस महानिदेशक (रेडियो वायरलेस) , आकाशवाणी लखनऊ की कार्यक्रम प्रमुख सुमोना पांडेय और अन्य अतिथि। |
आकाशवाणी लखनऊ द्वारा भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के सहयोग से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम “उत्सव वंदेमातरम्” का आयोजन
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
राजधानी के कैसरबाग स्थित भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय का कलामंडपम् शनिवार को राष्ट्रभक्ति के सुरों से गुंजायमान हो उठा। आकाशवाणी लखनऊ द्वारा विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम “उत्सव वंदेमातरम्” ने स्वाधीनता की चेतना और राष्ट्रीय गौरव को जीवंत कर दिया। शाम पांच बजे से रात आठ बजे तक चले इस समारोह में कला, संगीत और साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिला।
मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (रेडियो वायरलेस) आशुतोष पांडेय व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। आकाशवाणी लखनऊ की कार्यक्रम प्रमुख सुमोना पांडेय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत 'वंदेमातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह आयोजन राष्ट्र के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने इस सहयोग के लिए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह का आभार व्यक्त किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का रहा आकर्षण
कार्यक्रम की शुरुआत भातखण्डे विश्वविद्यालय के छात्र कलाकारों द्वारा 'वंदेमातरम्' (छह छंदों सहित) के सामूहिक गान से हुई, जिसने पूरे हॉल को देशभक्ति के उत्साह से भर दिया।
स्वातन्त्रय स्वरांजलि : डॉ. सूर्य कुमार पांडेय के लेखन और केवल कुमार के संगीत निर्देशन में आकाशवाणी के प्रतिष्ठित कलाकारों ने हिन्दी, अवधी और भोजपुरी में सुमधुर प्रस्तुतियां दीं। "तेरे लिए जियें हम, तुझ पर जान निसार करें..." पंक्तियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
वीर रस की गूंज : कार्यक्रम का विशेष आकर्षण 'आल्हा सम्राट' श्री रामरथ पाण्डेय और उनके साथियों का आल्हा गायन रहा। उनकी ओजपूर्ण रणभेरी ने वातावरण में वीर रस का संचार कर दिया।
लोकराग : अवधी और भोजपुरी लोकगीतों के माध्यम से श्रोताओं ने अपनी जड़ों और लोक संस्कृति का अनुभव किया।
साहित्यिक और नाट्य मंचन से किया मंत्रमुग्ध
कविगोष्ठी ‘मातृ स्वर-धारा’ के अंतर्गत वरिष्ठ कवि डॉ. शिव ओम अम्बर, शिव किशोर तिवारी ‘खंजन’, हिना रिज़वी हैदर और डॉ. सुमन दुबे ने राष्ट्र चेतना के गीतों से काव्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया।
वहीं, भारतेंदु नाट्य अकादमी (BNA) के कलाकारों ने सुप्रसिद्ध कृति ‘आनंदमठ’ का प्रभावशाली नाट्य मंचन किया। इस नाटक ने दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक कालखंड से रूबरू कराया।
प्रतियोगिता के विजेताओं को किया पुरस्कृत
युवाओं को इतिहास से जोड़ने के लिए ‘इतिहास के पन्नों से’ शीर्षक के तहत क्विज और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में संयोजक डॉ. उमाशंकर सिंह और उद्घोषक राजेश्वरी व नंदिनी की मुख्य भूमिका रही।
समारोह में ये गणमान्य व्यक्ति रहे मौजूद
समारोह के समापन पर उप निदेशक राजीव रंजन पांडेय ने सभी का आभार जताया। इस अवसर पर सहायक निदेशक विनय कुमार, चंद्र प्रकाश, आशीष चतुर्वेदी, सुभाष खन्ना, डॉ. सुशील राय, ममता उपाध्याय, प्रवीण, रमनप्रीत, और नीना सहित भारी संख्या में कलाप्रेमी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।






0 Comments
if you have any doubt,pl let me know