Lucknow के नवयुग कॉलेज में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती, विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कुशल प्रशासक व रणनीतिकार

लखनऊ के नवयुग कन्या महाविद्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन। मनोज जी और अपर्णा यादव ने शिवाजी के त्याग, कूटनीति और कुशल प्रशासन पर विचार रखे।

शिवाजी महाराज की जयंती पर लखनऊ में वैचारिक संगोष्ठी नवयुग कन्या महाविद्यालय


प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ

​लखनऊ के नवयुग कन्या महाविद्यालय (राजेंद्र नगर) में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्कृत विभाग, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), उत्तिष्ठ सेवा संस्थानम् और प्रो. शारदा प्रसाद तिवारी मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

​कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने की। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संपर्क प्रमुख मनोज जी और PCF के प्रबंध निदेशक डॉ. चंद्र भूषण त्रिपाठी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और उत्तिष्ठ सेवा संस्थानम् के संरक्षक डॉ. रमेश कुमार त्रिपाठी ने शिरकत की।

शिवाजी महाराज की चतुष्कोणीय रणनीति : मनोज जी

​मुख्य वक्ता मनोज जी ने अपने संबोधन में शिवाजी महाराज के जीवन के संघर्ष और विजय गाथा पर प्रकाश डाला। 

  • त्याग और बलिदान : शिवाजी का जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित रहा। उन्होंने 'हिंदू पदपादशाही' की स्थापना कर मुगलों के दमनकारी शासन को चुनौती दी।
  • माता जीजाबाई का योगदान : शिवाजी के चरित्र निर्माण में उनकी माता का सबसे बड़ा हाथ था।
  • रणनीति : शिवाजी ने युद्ध जीतने के लिए 'साम, दाम, दंड और भेद' की चतुष्कोणीय नीति को अपनाया। उन्होंने न केवल युद्ध लड़े, बल्कि मुगलों द्वारा तोड़े गए तुलजा भवानी मंदिर का जीर्णोद्धार कराकर समाज को सांस्कृतिक रूप से भी एकजुट किया।

सांस्कृतिक और वैचारिक युद्ध की आवश्यकता : अपर्णा यादव

​विशिष्ट अतिथि अपर्णा यादव ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि शिवाजी का शासन प्रबंधन आज के समय में भी प्रासंगिक है। उन्होंने सचेत किया कि आज भी कुछ शक्तियां भारत को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं, जिनसे हमें वैचारिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्तर पर लड़ना होगा।

राष्ट्र निर्माण में माता की भूमिका: प्रो. मंजुला उपाध्याय

​प्रो. मंजुला उपाध्याय ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि माता ही असली निर्माता होती है, जैसा जीजाबाई ने शिवाजी को गढ़कर सिद्ध किया। शिवाजी एक ऐसे कूटनीतिज्ञ थे जिनका प्रशासन मॉडल हर कालखंड के लिए अनुकरणीय है।

कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

  • शुभारंभ : दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती व शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ।
  • सम्मान : अतिथियों को अंगवस्त्रम्, पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक पौधा और 'गीतावली' पुस्तक भेंट की गई।
  • प्रस्तुति : छात्रा शीतल मिश्रा ने मधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
  • विमोचन : इस अवसर पर 'उत्तिष्ठ सेवा संस्थानम्' की विवरणिका (Brochure) का विमोचन भी किया गया।

धन्यवाद ज्ञापन एवं संचालन

कार्यक्रम का सफल संचालन संयोजिका प्रो. वन्दना द्विवेदी ने किया, जबकि डॉ. रमेश कुमार त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए महापुरुषों के बलिदान को याद रखने पर जोर दिया।

​कार्यक्रम में ये पदाधिकारी रहे उपस्थिति

​इस अवसर पर NSS कार्यक्रम अधिकारी डॉ. चंदन मौर्य, डॉ. मनीषा बडौनिया, सुश्री दीक्षा सहित प्रो. सुषमा त्रिवेदी, प्रो. ऋचा शुक्ला, प्रो. ज्योत्सना गौतम, डॉ. गीताली रस्तोगी, प्रो. नीतू सिंह, संस्थानम् के उपाध्यक्ष विकास तिवारी और बड़ी संख्या में महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित रहीं।

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