Shankaracharya Avimukteshwaranand High Court Stay : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत देते हुए यौन उत्पीड़न मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। जानें कोर्ट में हुई तीखी बहस और मामले के प्रमुख तथ्य।
यौन उत्पीड़न केस : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक, फैसला सुरक्षित
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, प्रयागराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित यौन उत्पीड़न (पॉक्सो एक्ट) मामले में नामजद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए अग्रिम जमानत अर्जी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
कोर्ट की दो बड़ी अहम बातें
- अंतिम फैसला आने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी।
- शंकराचार्य को जांच में पूर्ण सहयोग करना होगा।
अदालत में हुई बहस, दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें
न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ के समक्ष शुक्रवार शाम करीब एक घंटे से अधिक समय तक बहस चली।
सरकारी पक्ष (अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल) : सरकार ने याचिका की वैधानिकता (Maintainability) पर सवाल उठाए। तर्क दिया गया कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आया जा सकता, इसके लिए पहले निचली अदालत जाना चाहिए। कहा गया कि इस मामले में ऐसी कोई 'असाधारण परिस्थिति' नहीं है कि सीधे हाईकोर्ट हस्तक्षेप करे।
बचाव पक्ष (वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा) : वकील ने दलील दी कि यह पूरा मामला "सरकारी प्रायोजित साजिश" है। दावा किया गया कि शिकायतकर्ता खुद एक हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर गो-हत्या, हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं और उस पर 25 हजार का इनाम भी है। कोर्ट को बताया गया कि विवाद 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई एक मारपीट से शुरू हुआ था। जब उस मामले में केस दर्ज नहीं हुआ, तो झूठा पॉक्सो केस बनाया गया। बच्चों की मार्कशीट और मेडिकल रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए गए, जिसमें करीब एक महीने की देरी बताई गई है।
"यह मामला केवल भ्रम पैदा करने और छवि धूमिल करने के लिए रचा गया है। बच्चों के असली माता-पिता का पता नहीं है और शिकायत किसी तीसरे पक्ष (संरक्षक) के जरिए कराई गई है।" - पीएन मिश्रा, बचाव पक्ष के अधिवक्ता।
मामले की पृष्ठभूमि और आरोप
बीते रविवार को प्रयागराज के झूंसी थाने में आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि माघ मेला और महाकुंभ के दौरान नाबालिगों के साथ कुकर्म किया गया। पुलिस इस मामले में पूछताछ, पीड़ितों के बयान और मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है।
शंकराचार्य बोले : "झूठ की कलई जल्द खुलेगी"
सुनवाई से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट पर भरोसा जताते हुए कहा कि यह सब उन्हें बदनाम करने की कोशिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस आखिर किसे संरक्षण दे रही है और कुकर्म की मेडिकल रिपोर्ट की सच्चाई क्या है, यह कोर्ट में साबित करना होगा।
अब आगे क्या होगी कार्रवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट अब मार्च के तीसरे हफ्ते में इस केस की अगली सुनवाई करेगा। तब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगी स्वामी मुकुंदानंद के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक जारी रहेगी।

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