लखनऊ विश्वविद्यालय में RSS प्रमुख मोहन भागवत के आगमन पर छात्र संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। NSUI, सपा छात्र सभा और भीम आर्मी ने वैचारिक ध्रुवीकरण और सांप्रदायिकता का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।
लखनऊ विश्वविद्यालय में मोहन भागवत का विरोध: NSUI, सपा छात्र सभा और भीम आर्मी ने लगाए 'Go Back' के नारे
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) परिसर उस समय राजनीतिक अखाड़ा बन गया जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के आगमन पर विभिन्न छात्र संगठनों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI), समाजवादी छात्र सभा और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर मोहन भागवत के खिलाफ नारेबाजी की और परिसर में 'मोहन भागवत गो बैक' के नारे गूंज उठे।
विचारधारा थोपने का आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों का मुख्य आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन एक विशिष्ट विचारधारा को शिक्षा के क्षेत्र में थोपने का प्रयास कर रहा है। छात्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय 'तर्क और विवेक' का स्थान है, लेकिन इस तरह के आयोजनों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कसंगत विमर्श को नुकसान पहुंचता है। उनका कहना है कि जो विचारधारा लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है, उसका परिसर में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
छात्र नेताओं के कड़े प्रहार, किसने क्या कहा
विरोध प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग छात्र संगठनों के नेताओं ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं हैं।
अहमद रज़ा खान (NSUI) : उन्होंने आरोप लगाया कि मोहन भागवत जैसे व्यक्तित्व के आगमन से शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिलेगा, जो देश की एकता के लिए खतरा है।
शुभम खरवार (NSUI) : शुभम ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि RSS का इतिहास तिरंगे के विरोध का रहा है। उन्होंने संगठन को 'एक रंग का समर्थक' बताते हुए इसे देश की आत्मा का विरोधी करार दिया।
जीतू कश्यप (सपा छात्र सभा) : जीतू ने कहा कि देश को जाति और धर्म के नाम पर बांटने वाले लोग विश्वविद्यालय के शांत माहौल में अराजकता पैदा करने का काम कर रहे हैं।
विराट शेखर (अध्यक्ष, भीम आर्मी) : विराट ने आर्थिक पहलू पर सवाल उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के पैसे का उपयोग उनके कल्याण के लिए करना चाहिए, न कि "नफरती विचारधारा" वाले लोगों के स्वागत-सत्कार में।
सांप्रदायिकता और शिक्षा पर बहस
प्रदर्शनकारियों का एक साझा स्वर यह था कि आरएसएस हमेशा से देश में सांप्रदायिक माहौल को बढ़ावा देने का जिम्मेदार रहा है। छात्रों ने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति को विश्वविद्यालय में आमंत्रित कर समाज को क्या संदेश दिया जा रहा है।
"विश्वविद्यालय एक ऐसी जगह है जहाँ स्वतंत्र सोच को बढ़ावा मिलना चाहिए, न कि किसी खास एजेंडे को।" - विरोध कर रहे छात्रों का सामूहिक वक्तव्य।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
विरोध प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर बहस छिड़ गई है, जहां एक पक्ष इसे वैचारिक स्वतंत्रता बता रहा है, तो दूसरा इसे शैक्षणिक माहौल खराब करने की कोशिश करार दे रहा है।
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