लखनऊ में 'गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0' का भव्य शुभारंभ। 70 संस्थानों के 700 डॉक्टर भारत-नेपाल सीमा के 300 स्थानों पर थारू जनजाति और सीमावर्ती ग्रामीणों का मुफ्त इलाज करेंगे।
गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0: भारत-नेपाल सीमा पर 700 डॉक्टर देंगे सेवा, उप-मुख्यमंत्री ने दिखाई हरी झंडी
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान से "गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0" का भव्य आगाज हुआ। अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्तरंजन जी और उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (NMO) और श्रीगुरु गोरखनाथ सेवा न्यास द्वारा आयोजित यह यात्रा भारत-नेपाल सीमा के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य क्रांति लाने का एक बड़ा प्रयास है।
700 डॉक्टर और 300 कैंप : सेवा का महाकुंभइस वर्ष की यात्रा में देश के लगभग 70 प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों से 700 डॉक्टर और मेडिकल छात्र उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। यह टीम सीमावर्ती सात जिलों में फैले थारू बाहुल्य क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देगी।श, इसमें खासकर पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर शामिल हैं।
इन जिलों के लगभग 300 स्थानों पर मेडिकल कैंप आयोजित किए जाएंगे, जहाँ स्थानीय निवासियों को विशेषज्ञ परामर्श और दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।अत्याधुनिक तकनीक : 'स्पन्दन' से होगी दिल की जांचइस बार की यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता नवाचार (Innovation) है। कैंपों में चिकित्सकों को "स्पन्दन ईसीजी मशीन" वितरित की गई है।
खासियत : यह विश्व की सबसे छोटी ईसीजी मशीन है जो बिना बैटरी और बिना इंटरनेट के भी काम करती है। यह रिमोट एरिया में त्वरित और सटीक हृदय जांच सुनिश्चित करेगी।उप-मुख्यमंत्री का संदेश : "अकेलापन शत्रु और राष्ट्र सुरक्षा सर्वोपरि"
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मेडिकल छात्रों का उत्साहवर्धन किया।
सामूहिक जीवन : छात्रों को पढ़ाई और मनोरंजन, दोनों में समूहों में रहना चाहिए, क्योंकि अकेलापन सबसे बड़ा शत्रु है।
सतर्कता : उन्होंने मेडिकल संस्थानों में "सफेद कोट आतंकवाद" के बढ़ते नेटवर्क पर चिंता जताते हुए छात्रों को राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति सजग रहने और ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की नसीहत दी।
अनुभव यात्रा : थारू समाज के बीच सेवा और समर्पण
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख स्वान्तरंजन जी ने इस यात्रा को 'अनुभव यात्रा' करार दिया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में डॉक्टर दो दिनों तक स्थानीय थारू परिवारों के घर ही रुकेंगे। यह डॉक्टरों के लिए शहरी चकाचौंध से दूर देश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और थारू जनजाति की धार्मिक अडिगता को समझने का अवसर है।
उन्होंने पिछले वर्ष का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे इस यात्रा के प्रभाव से एक सड़क विहीन गाँव को पीपे के पुल से जोड़ा गया।
यात्रा का स्वरूप और संगठन
यह यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अवध प्रान्त के मार्गदर्शन में वर्ष 2019 से निरंतर आयोजित हो रही है। इसमें एनएमओ, सेवा भारती, आरोग्य भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, विश्व हिन्दू परिषद और सीमा जागरण मंच का संयुक्त सहयोग रहता है।
प्रक्रिया : 2 दिन गाँवों में छोटे कैंप और अंतिम दिन जिला स्तर पर मेगा कैंप।
प्रभाव : प्रत्येक जिले में औसतन 20 से 25 हजार लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह, असीम अरुण, एमएलसी पवन सिंह चौहान, विधायक ओपी श्रीवास्तव सहित चिकित्सा जगत की बड़ी हस्तियां जैसे प्रो. एमएलबी भट्ट, प्रो. सीएम सिंह और प्रो. अजय सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन न्यास के महासचिव डॉ. भूपेंद्र सिंह ने किया।





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