UP Blood Bank : ब्लड बैंकों का बनेगा नेटवर्क, लखनऊ मंडल से शुरुआत; थैलेसीमिया मरीजों को मिलेगी राहत


उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों में ब्लड बैंकों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। लखनऊ मंडल से शुरू होने वाली इस पहल से थैलेसीमिया मरीजों को आसानी से रक्त मिलेगा और खून खराब होने की समस्या खत्म होगी।

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ

उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब सभी मंडलों में ब्लड बैंकों का एक डिजिटल नेटवर्क बनाया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य थैलेसीमिया और हीमोफीलिया जैसे गंभीर रोगों के मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना और ब्लड बैंकों में रक्त प्रबंधन में सुधार करना है। इस डिजिटल पहल से न केवल संसाधनों का सही उपयोग होगा, बल्कि आपातकालीन स्थिति में जानें बचाने में भी मदद मिलेगी।

रक्त की बर्बादी रुकेगी, निगेटिव ग्रुप की कमी दूर होगी

प्रदेश में 400 ब्लड बैंक संचालित हैं, जिनमें से 105 सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में हैं। हर साल करीब 25 लाख यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। इसमें करीब 30 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान से मिलता है और बाकी मरीजों के परिजन डोनेट करते हैं। ऐसे ही करीब 36 थैलेसीमिया और हीमोफीलिया उपचार केंद्र हैं। इनमें तालमेल की कमी से रक्त की एक्सपायरी एक बड़ी समस्या बनी रहती है। 

लखनऊ मंडल से पहले चरण का आगाज

इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण की शुरुआत लखनऊ मंडल से की जा रही है। इस नेटवर्क के अंतर्गत लखनऊ के साथ-साथ हरदोई, लखीमपुर, रायबरेली, सीतापुर और उन्नाव के ब्लड बैंकों को आपस में जोड़ा जाएगा। इस मंडल में यह प्रयोग सफल रहा तो इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। इसके लिए राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय साढ़ामऊ के सीएमएस डॉ. वीके शर्मा को नोडल ऑफिसर बनाया गया है। वह डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के ब्लड बैंक के प्रभारी भी रह चुके हैं।

डिमांड और सप्लाई : प्रदेश में हर साल करीब 25 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है।

स्वैच्छिक दान : कुल रक्त का केवल 30 फीसदी हिस्सा ही स्वैच्छिक रक्तदान से प्राप्त होता है।

निगेटिव ग्रुप : 'ओ-निगेटिव' जैसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप्स की प्रदेश में लगातार कमी बनी रहती है।

नेटवर्क बन जाने से यह पता चल सकेगा कि किस ब्लड बैंक में किस ग्रुप का कितना रक्त उपलब्ध है, जिससे जरूरत पड़ने पर एक जिले से दूसरे जिले में तुरंत रक्त भेजा जा सकेगा।

थैलेसीमिया मरीजों के लिए वरदान

प्रदेश में वर्तमान में 36 थैलेसीमिया व हीमोफीलिया उपचार केंद्र संचालित हैं। इन मरीजों को नियमित अंतराल पर रक्त की आवश्यकता होती है। नेटवर्क सिस्टम लागू होने से इन केंद्रों पर रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे तीमारदारों को भटकना नहीं पड़ेगा। डिजिटल पहल से न केवल संसाधनों का सही उपयोग होगा, बल्कि आपातकालीन स्थिति में कीमती जानों को बचाने में भी मदद मिलेगी।

ब्लड बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार कराएंगे

अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि नए प्रयोग के जरिये हर मरीज को उनके जिले में आसानी से ब्लड उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए नोडल अधिकारी ब्लड बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार कराएंगे। ब्लड डोनेशन के लिए विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। यह प्रयोग सफल रहा तो पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जाएगा।

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