प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी 'अभ्युदय योजना' (Abhyudaya Yojana) में नियुक्तियों को लेकर एक बड़ा सनसनीखेज खुलासा हुआ है। राज्य के मेधावी छात्रों को मुफ्त कोचिंग देने वाली इस योजना में कोर्स कोऑर्डिनेटर की भर्ती में भारी धांधली की पुष्टि हुई है। जांच में सामने आया है कि तैनात किए गए 69 कोर्स कोऑर्डिनेटरों में से 48 उम्मीदवार निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते थे।
आएं जानें पूरा मामला
समाज कल्याण विभाग द्वारा कराई गई जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 60 हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर रखे गए अधिकांश कोऑर्डिनेटर अयोग्य हैं। भर्ती के नियमों के मुताबिक, इस पद के लिए यूपी पीसीएस (UP PCS) की मुख्य परीक्षा पास होना अनिवार्य था।
जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- कुल 69 नियुक्तियों में से केवल 21 ही योग्य पाए गए।
- बाकी 48 उम्मीदवारों में से केवल 6 ने ही कभी प्रारंभिक परीक्षा (Pre) पास की थी।
- मुख्य परीक्षा (Mains) पास करने वाला एक भी अयोग्य उम्मीदवार नहीं मिला।
अफसरों और एजेंसी की मिलीभगत
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह गड़बड़ी विभाग के कुछ अफसरों और आउटसोर्सिंग एजेंसी 'अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड' की साठगांठ से हुई है। पैसे और पहुंच के दम पर अयोग्य लोगों को इस महत्वपूर्ण पद पर बैठा दिया गया। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा था।
गोमती नगर थाने में FIR दर्ज
इस बड़े खुलासे के बाद शासन के निर्देश पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसी और संबंधित अयोग्य कोर्स कोऑर्डिनेटरों के खिलाफ लखनऊ के गोमती नगर थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है। विभाग अब उन अफसरों की भूमिका की भी जांच कर रहा है जिन्होंने इन फाइलों को मंजूरी दी थी।
अभ्युदय योजना का उद्देश्य
अभ्युदय योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को IAS, PCS और बैंकिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग देना है। ऐसे में चयन प्रक्रिया में हुई धांधली सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़े करती है।

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