रायबरेली के बैंक ऑफ बड़ौदा में 9.2 करोड़ के फर्जी लोन का खुलासा हुआ है। सचिवालय और शिक्षा विभाग के जाली दस्तावेजों पर लोन लेने के मामले में बैंक मैनेजर ने 48 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।
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| रायबरेली स्थित बैंक ऑफ़ बड़ौदा की मुख्य शाखा। |
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, रायबरेली
रायबरेली में बैंकिंग जगत में हलचल: 9.2 करोड़ के फर्जी लोन का खुलासा, सचिवालय के नाम पर भी धोखाधड़ी
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले की बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) की मुख्य शाखा में 9.2 करोड़ रुपये के फर्जी लोन का खुलासा हुआ है। जालसाजों ने बैंक को धोखा देने के लिए फर्जी आधार कार्ड और उत्तर प्रदेश सचिवालय सहित 15 सरकारी विभागों के जाली वेतन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया है। बैंक प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 48 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे
शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने पुलिस और बैंक प्रशासन को हैरान कर दिया है। आरोपियों ने लोन लेने के लिए लखनऊ सचिवालय, जिला पंचायत, परिवार कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग समेत 15 विभागों के फर्जी लेटर पैड और वेतन पर्चियां तैयार कराईं। इसके अलावा लोन लेने के लिए आरोपियों ने 'आदर्श ट्रेडर्स' और 'रायबरेली ट्रेडर्स' को आय का मुख्य स्रोत बताया, जो जांच में फर्जी पाए गए। बैंक को गुमराह करने के लिए फर्जी आधार कार्ड और अन्य जाली दस्तावेजों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।
बैंक की मुख्य शाखा का मामला
यह पूरा मामला शहर में स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा का है। इतने बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी ने बैंक की आंतरिक सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आशंका है कि इस मामले में कुछ विभागों की मिलीभगत भी हो सकती है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है।
प्रशासन सख्ती बरत रहा है
पुलिस का कहना है कि दोषियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। इस घोटाले के तार कहां-कहां जुड़े हैं और कौन-कौन से बड़े गिरोह इसमें शामिल हैं, इसका जल्द ही खुलासा किया जाएगा।
बैंक प्रबंधक बोले, "ऑडिट और वेरिफिकेशन में खुली पोल"
बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा के प्रबंधक के अनुसार, यह धोखाधड़ी बेहद शातिराना तरीके से की गई थी। प्रबंधक ने अपने बयान में हर पहलू को बिंदुवार स्पष्ट किया है।
आंतरिक जांच (Internal Audit): बैंक प्रबंधक ने बताया कि लोन की फाइलों में नियमित ऑडिट और वेरिफिकेशन के दौरान कुछ दस्तावेजों पर संदेह हुआ। जब संबंधित विभागों (जैसे सचिवालय और शिक्षा विभाग) से इन वेतन प्रमाण पत्रों का मिलान कराया गया, तो विभागों ने इन्हें जारी करने से साफ इनकार कर दिया।
सुनियोजित साजिश : प्रबंधक का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि संगठित गिरोह की साजिश है। बैंक को गुमराह करने के लिए 'आदर्श ट्रेडर्स' और 'रायबरेली ट्रेडर्स' जैसे फर्जी संस्थानों के नाम पर कागजी ट्रांजेक्शन दिखाए गए।
शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) : प्रबंधक ने स्पष्ट किया कि जैसे ही 9.2 करोड़ रुपये की हेराफेरी की पुष्टि हुई, उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तुरंत पुलिस में तहरीर दी गई। बैंक रिकवरी की प्रक्रिया व कानूनी कार्रवाई पर जोर दे रहा है।
सख्त कार्रवाई की मांग : बैंक प्रबंधक ने अपनी तहरीर में सभी 48 लाभार्थियों और उनके मददगारों को नामजद किया है। उन सभी ने फर्जी आधार कार्ड और विभाग की फर्जी मुहरों का उपयोग कर बैंक के साथ विश्वासघात किया है।

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