दिनांक : 11 जनवरी 2026
दिन : रविवार
विक्रम संवत् : 2082
अयन : दक्षिणायण
ऋतु : शिशिर
मास : माघ
पक्ष : कृष्ण
तिथि : अष्टमी सुबह 10:20 बजे तक तत्पश्चात नवमी
नक्षत्र : चित्रा शाम 06:12 बजे तक तत्पश्चात स्वाती
योग : सुकर्मा शाम 05:27 बजे तक तत्पश्चात धृति
करण : कौलव सुबह 10:20 बजे तक तत्पश्चात तैतिल
राहुकाल : शाम 04:15 बजे से 05:35 बजे तक
सूर्योदय : प्रातः 06:58 बजे
सूर्यास्त : संध्या 05:35 बजे
दिशा शूल : पश्चिम दिशा में
ब्रह्ममुहूर्त : प्रातः 05:09 बजे से प्रातः 06:03 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:46 बजे से रात्रि 12:40 बजे तक
सूर्य राशि : धनु
चंद्रमा राशि : तुला
बृहस्पति राशि : मिथुन
शनिवार को पीपल की जड़ में जल, दूध, शक्कर और काले तिल मिलाकर चढ़ाएं।
सरसों के तेल का दीपक जलाएं (काले तिल डालकर) और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें। यह पितृ दोष और शनि प्रकोप से राहत दिलाता है।
परिक्रमा और मंत्र
पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें, साथ ही 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से ग्रह बाधाएं दूर होती हैं। कार्य सिद्ध होते हैं।
पीपल के पत्ते के उपाय
पीपल के 11 पत्ते तोड़कर उनकी माला बनाएं और शनिदेव को अर्पित करें।
पीपल के पांच पत्ते काले धागे में बांधकर घर के मुख्य दरवाजे पर लगाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
कष्ट निवारण
शारीरिक कष्टों (कमर दर्द, थकान) के लिए पीपल की जड़ या लकड़ी को काले कपड़े में बांधकर सिरहाने रखें।
मनोकामना पूर्ति के लिए जल में गुड़ और दूध मिलाकर चढ़ाएं और परिक्रमा करें।
ध्यान रखने योग्य बातें
पीपल के पेड़ को नुकसान न पहुँचाएं, केवल सेवा भाव से पूजा करें। इन उपायों से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
आचार्य आदित्य वशिष्ठ
वाट्सएप नं:- 7309053333
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