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| ड्रिलिंग करते श्रमिक। |
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के भू-गर्भ में छिपे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के भंडारों का पता लगाने के लिए आयल इंडिया लिमिटेड ने अपनी कवायद तेज कर दी है। हैदराबाद से आई विशेषज्ञों की टीम ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों में सर्वे के बाद अब गांवों में ड्रिलिंग और बोरिंग का काम शुरू कर दिया है।
4 गांवों में 25 स्थानों पर ड्रिलिंग शुरू
रविवार को अल्फा जियो इंडिया लिमिटेड (हैदराबाद) की टीम विशुनगढ़ थाना क्षेत्र के तीन गांवों:- कुड़रा, रैपुरा और पोपपुर में पहुंची। आधुनिक मशीनों के साथ टीम ने इन क्षेत्रों में करीब 20 स्थानों पर बोरिंग की। इसके अलावा, तिर्वा के बहसार गांव में भी 5 अलग-अलग स्थानों पर ड्रिलिंग का काम पूरा किया गया।
बोरिंग और विस्फोट से होगी जांच
जिला खान अधिकारी संदेश पटेल के अनुसार, यह जांच प्रक्रिया काफी तकनीकी है।
ड्रिलिंग की गहराई : टीम जमीन के अंदर करीब 30 से 60 मीटर तक गहरी बोरिंग कर रही है।
विस्फोट तकनीक : बोरिंग सूखने के बाद जमीन के भीतर बारूद से नियंत्रित विस्फोट किया जाएगा।
सैंपल टेस्टिंग : विस्फोट से निकलने वाली तरंगों और मिट्टी के नमूनों को लैब भेजा जाएगा, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की मौजूदगी का सटीक पता चल सकेगा।
किसानों का विरोध और मुआवजे का आश्वासन
खेतों में भारी मशीनें और ड्रिलिंग देखकर शुरुआती तौर पर किसानों ने फसल नुकसान को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, टीम के अधिकारियों और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है।
जिन किसानों की फसल को नुकसान होगा, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं, यह एक सामान्य शोध प्रक्रिया है।आयल इंडिया लिमिटेड की टीम पेट्रोलियम अन्वेषण (Exploration) को लेकर कार्य कर रही है। जिला प्रशासन इस शोध कार्य में पूरा सहयोग कर रहा है।
ज्ञानेंद्र कुमार द्विवेदी, एसडीएम, छिबरामऊ (कन्नौज)
इन इलाकों में भी होगी खोज
हैदराबाद की यह टीम केवल इन्हीं गांवों तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले दिनों में पेट्रोलियम की खोज का दायरा बढ़ाया जाएगा।
मलिकपुर-सौरिख रोड
गुरसहायगंज क्षेत्र
फर्रुखाबाद के संभावित क्षेत्र।
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