Ayodhya में कर्मयोगिनी माता अहिल्या: जीवंत हुआ लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का गौरवशाली इतिहास

अयोध्या में 'कर्मयोगिनी माता अहिल्या' महानाट्य का भव्य मंचन। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर त्याग, सुशासन और नारी शक्ति के अद्भुत संगम की जीवंत प्रस्तुति।


गूंजी लोकमाता की गाथा : 'कर्मयोगिनी माता अहिल्या' महानाट्य ने दिखाया भारतीय संस्कृति में नारी का उच्च स्थान

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, अयोध्या

अयोध्या के अंगद टीला परिसर में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर "कर्मयोगिनी माता अहिल्या" महानाट्य का भव्य आयोजन किया गया। इस नाटक ने न केवल दर्शकों को भावविभोर किया, बल्कि भारतीय दर्शन में नारी शक्ति की महत्ता और अहिल्याबाई के सुशासन को जीवंत कर दिया।

संस्कृति मंत्रालय और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की संयुक्त पहल

​यह आयोजन केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय (CCRT) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि और ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने दीप प्रज्वलित कर किया।

नारी सशक्तीकरण नहीं, नारी 'शक्ति स्वरूपा' है

​महानाट्य ने समाज को एक कड़ा संदेश दिया कि "नारी सशक्तिकरण" जैसे शब्द पश्चिमी सभ्यता की देन हो सकते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति में नारी सदैव पूजनीय और शक्ति स्वरूपा रही है। नाटक के माध्यम से अहिल्याबाई के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है।

नाटक का मंचन करते कलाकार।

नाटक का मंचन करते कलाकार।
बाल्यकाल और विवाह : निर्भीक अहिल्या का मालवा के राजा मल्हार राव के पुत्र खांडे राव से विवाह।

प्रशासनिक दक्षता : ससुर मल्हार राव द्वारा बहू को राज्य संचालन की जिम्मेदारी सौंपना।

​त्याग और संकल्प : पति की वीरगति के बाद ससुर की प्रेरणा से सिंहासन स्वीकार करना और एक कर्मयोगी की भांति न्यायोचित शासन करना।

​सांस्कृतिक पुनरुत्थान : मंदिरों, धर्मशालाओं और सराय का निर्माण कर जनहित के कार्यों की झड़ी लगाना।

कला और तकनीक का अद्भुत संगम

​मंचन के दौरान भारतीय शास्त्रीय परंपराओं, लोकनृत्य और सजीव संगीत का बेहतरीन समन्वय देखने को मिला।

​ध्वनि समन्वय : नाटक में 'प्री-रिकॉर्डेड' संवादों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन कलाकारों के जीवंत अभिनय और लिप-सिंक (Lip-sync) की सटीकता ऐसी थी कि दर्शक अंत तक मंत्रमुग्ध रहे।

​प्रमुख कलाकार : अहिल्याबाई की मुख्य भूमिका सारा शर्मा ने निभाई, जबकि बचपन का किरदार प्रियंका वर्मा ने निभाया। सिद्धार्थ (मल्हार राव) और पीयूष गंभीर (खांडेराव) सहित करीब 40 कलाकारों ने मंच पर समां बांध दिया।

​आयोजन समिति और गणमान्य अतिथि

​इस महानाट्य की संकल्पना और निर्देशन CCRT के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर ने किया। कार्यक्रम में डॉ. अनिल मिश्र (ट्रस्टी), राजेंद्र सिंह "पंकज" (विहिप), संजीब सिंह (निदेशक, संग्रहालय) सहित सीसीआरटी के वरिष्ठ अधिकारी जैसे आशुतोष और भगवान वर्मा भी उपस्थित रहे।

मुख्य आकर्षण: एक नज़र में


श्रेणी : विवरण

आयोजन स्थल : अंगद टीला परिसर, अयोध्या

अवसर : लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती

मुख्य संदेश : त्याग, सेवा, सुशासन और लोककल्याण

प्रस्तुतकर्ता : सीसीआरटी (CCRT) एवं अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय

विशेषता : ऐतिहासिक चेतना और नैतिक नेतृत्व का प्रसार।


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