HBTU कानपुर में FSSAI सेमिनार: जानें अधिक नमक-चीनी के नुकसान और 14 अंकों के कोड का महत्व

HBTU कानपुर में आयोजित सेमिनार में FSSAI निदेशक डॉ. सानू जैकब ने 'ईट राइट इंडिया' कैंपेन और खाद्य सुरक्षा पर चर्चा की। जानें कैसे करें FSSAI 14-अंकों के लाइसेंस कोड की जांच।

सेमिनार में अतिथि को सम्मानित करते आयोजन।
HBTU कानपुर : 'ईट राइट इंडिया' अभियान के जरिये FSSAI ने दी चेतावनी, ज्यादा नमक और चीनी सेहत के लिए घातक

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कानपुर 

हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (HBTU) में शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा और पोषण पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान FSSAI के निदेशक डॉ. सानू जैकब ने स्पष्ट किया कि अनजाने में अधिक नमक और चीनी का सेवन भारतीयों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचा रहा है।

सेमिनार में मौजूद अतिथि व वक्ता।


'ईट राइट इंडिया' कैंपेन : आपकी थाली, आपकी सेहत

​डॉ. जैकब ने बताया कि देश में बड़ी संख्या में लोग अपने आहार में नमक और चीनी की सही मात्रा से अनजान हैं। इसकी अधिकता से लोग समय से पहले ही गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

समाधान : FSSAI का 'ईट राइट इंडिया' (Eat Right India) कैंपेन नागरिकों को जागरूक कर रहा है कि वे अपने दैनिक आहार में पोषक तत्वों का संतुलन कैसे बनाएं।

14 अंकों के कोड से ऐसे करें पहचान

​अक्सर ग्राहकों को उत्पाद की शुद्धता पर संदेह होता है। निदेशक ने इसके लिए एक आसान तरीका बताया है।

  1. ​हर मान्यता प्राप्त खाद्य उत्पाद पर FSSAI की मुहर और 14 अंकों का कोड होता है।
  2. ​उपभोक्ता फॉसकॉस (FoSCoS) पोर्टल पर जाकर इस कोड को दर्ज कर सकते हैं।
  3. ​यदि पोर्टल पर दी गई जानकारी उत्पाद से मेल नहीं खाती, तो समझ लें कि उत्पाद संदिग्ध है।

फूड सेफ्टी कनेक्ट एप: जेब में खाद्य सुरक्षा

​खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और आम जनता की मदद के लिए FSSAI ने 'फूड सेफ्टी कनेक्ट एप' विकसित किया है। यह एप खान-पान से जुड़ी सटीक जानकारी और शिकायत दर्ज करने का एक प्रभावी माध्यम है। डॉ. जैकब ने जोर दिया कि कंपनियों को अपने लेबल पर सही और पारदर्शी जानकारी देनी चाहिए ताकि उपभोक्ता जागरूक निर्णय ले सकें।

सेमिनार के मुख्य बिंदु और विशेषज्ञ राय

​सेमिनार का विषय 'मानव स्वास्थ्य पोषण एवं पाम आयल की भूमिका: संतुलित सत्य' रखा गया था। कार्यक्रम में कई दिग्गज विशेषज्ञों ने शिरकत की। इसमें फेयर लैब्स के एमडी द्विजेंद्र माथुर, मलेशियन पाम आयल काउंसिल के रीजनल मैनेजर डॉ. रोशन मार्टिस, आयल टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन आफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजीव चुरी और HBTU के वरिष्ठ प्रोफेसर, प्रो. पी.के. यादव शामिल रहे। इन सभी ने संतुलित आहार में तेल और वसा के सही चयन पर भी विस्तार से चर्चा की। बताया कि कैसे सही पोषण से बीमारियों को दूर रखा जा सकता है।

FSSAI की DART गाइडलाइन

FSSAI ने DART (Detect Adulteration with Rapid Test) नाम से एक गाइडलाइन जारी की है, जिससे आप घर बैठे ही साधारण चीजों की शुद्धता चेक कर सकते हैं।इसके लिए ये हैं कुछ महत्वपूर्ण घरेलू टेस्ट।

1. हल्दी में मिलावट की जांच (Metanil Yellow)

हल्दी को पीला दिखाने के लिए अक्सर इसमें हानिकारक मेटानिल येलो मिलाया जाता है।

टेस्ट : एक गिलास पानी में आधा चम्मच हल्दी डालें।

शुद्ध : हल्दी धीरे-धीरे नीचे बैठ जाएगी और पानी हल्का पीला दिखेगा।

मिलावटी : अगर पानी का रंग तुरंत गहरा या चटक पीला हो जाता है, तो उसमें मिलावट हो सकती है।

2. दूध में डिटर्जेंट की पहचान

दूध को गाढ़ा और झागदार बनाने के लिए कभी-कभी डिटर्जेंट मिलाया जाता है।

टेस्ट : एक शीशी में थोड़ा सा दूध और बराबर मात्रा में पानी डालें। इसे जोर से हिलाएं।

शुद्ध : बहुत मामूली झाग बनेगा जो जल्दी खत्म हो जाएगा।

मिलावटी : यदि इसमें गाढ़ा और साबुन जैसा झाग बनता है जो देर तक टिका रहता है, तो इसमें डिटर्जेंट हो सकता है।

3. शहद की शुद्धता (पानी का टेस्ट)

शहद में अक्सर चाशनी (Sugar Syrup) मिलाई जाती है।

टेस्ट : एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद डालें।

शुद्ध : शहद बिना घुले एक धार बनकर सीधा नीचे जाकर गिलास की तली में बैठ जाएगा।

मिलावटी : मिलावटी शहद पानी में गिरते ही घुलने लगेगा।

4. काली मिर्च में पपीते के बीज

टेस्ट : एक गिलास पानी में काली मिर्च के दाने डालें।

शुद्ध : असली काली मिर्च भारी होने के कारण पानी में नीचे बैठ जाएगी।

मिलावटी : पपीते के बीज हल्के होते हैं, इसलिए वे पानी के ऊपर तैरने लगेंगे।

5. हरी सब्जियों में मेलाकाइट ग्रीन (रंग)

परवल, मटर या भिंडी को ज्यादा हरा दिखाने के लिए उनमें मेलाकाइट ग्रीन का इस्तेमाल होता है।

टेस्ट : रुई (Cotton) का एक टुकड़ा लें और उसे लिक्विड पैराफिन या साधारण कुकिंग ऑयल में भिगोएं। अब सब्जी के बाहरी हिस्से पर इसे रगड़ें।

शुद्ध : रुई साफ रहेगी।

मिलावटी : अगर रुई हरी हो जाती है, तो सब्जी पर कृत्रिम रंग चढ़ा हुआ है।

सावधानी : ये टेस्ट प्राथमिक जांच के लिए हैं। यदि आपको किसी बड़े ब्रांड या प्रोडक्ट पर गहरा संदेह है, तो आप 'फूड सेफ्टी कनेक्ट एप' के जरिए इसकी शिकायत दर्ज कर सकते हैं या सरकारी लैब में भेज सकते हैं।

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