Waqf Properties : वक्फ संपत्तियों की हिफाज़त सामूहिक जिम्मेदारी, Lucknow में पूर्व मंत्री ने की डिजिटल सर्वे की मांग

पसमांदा मुस्लिम समाज के अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने अवकाफ तहफ्फुज़ दिवस पर वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और डिजिटल सर्वे की मांग की। जानें वक्फ सुधार पर उनके प्रमुख सुझाव।

 पत्रकारों से बातचीत करते पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी।
Lucknow वक्फ संपत्तियां कौम की अमानत, इनकी हिफाज़त पूरे समाज की जिम्मेदारी: अनीस मंसूरी

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ

अवकाफ तहफ्फुज़ दिवस' के अवसर पर पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने वक्फ संपत्तियों के संरक्षण को लेकर आवाज उठाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ संपत्तियों की रक्षा करना केवल सरकार या वक्फ बोर्ड का काम नहीं है, बल्कि यह पूरे मुस्लिम समाज की सामूहिक और नैतिक जिम्मेदारी है।

वक्फ का असली उद्देश्य और पसमांदा समाज

पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने वक्फ के मूल इस्लामी सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा कि वक्फ की अवधारणा समाज के सबसे कमजोर वर्गों, जैसे यतीम बच्चों, विधवाओं और गरीबों के कल्याण के लिए की गई थी। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि आज वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का लाभ उन पसमांदा और जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुँच पा रहा है, जिनके लिए ये संपत्तियां समर्पित की गई थीं। उन्होंने कहा कि यदि वक्फ की आमदनी का पारदर्शी उपयोग होने पर मुस्लिम समाज की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।

डिजिटल सर्वे और अतिक्रमण मुक्त वक्फ की मांग

वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन पर चिंता व्यक्त करते हुए पूर्व मंत्री ने सरकार और वक्फ बोर्ड के समक्ष प्रमुख मांगें रखीं हैं।

डिजिटल सर्वे : सभी वक्फ संपत्तियों का आधुनिक तकनीक से डिजिटल सर्वे कराया जाए।

पारदर्शी निगरानी : वक्फ की आय और व्यय के लिए एक पारदर्शी ऑनलाइन सिस्टम विकसित हो।

अवैध कब्जों से मुक्ति : जो संपत्तियां भू-माफियाओं या अवैध कब्जे की चपेट में हैं, उन्हें तत्काल मुक्त कराया जाए।

संगठित लड़ाई का आह्वान

मंसूरी ने समाज से अपील की कि वक्फ की सुरक्षा के लिए केवल नारों तक सीमित न रहें, बल्कि संगठित होकर कानूनी लड़ाई लड़ें। उन्होंने आम मुसलमानों से आग्रह किया कि वे सतर्क रहें और वक्फ संपत्तियों में किसी अनियमितता या गड़बड़ी पाए जाने पर तुरंत अधिकारियों को सूचित करें।

उन्होंने कहा कि 'अवकाफ तहफ्फुज़ दिवस' को मात्र एक औपचारिकता न मानकर एक संकल्प के रूप में लेना चाहिए। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के हक और उनकी अमानत को हर हाल में महफूज़ रखना है।

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