Bareilly बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा; संतों के अपमान और UGC कानून के खिलाफ उठाया कदम

बरेली (Bareilly) के सिटी मजिस्ट्रेट (City Magistrate) अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस (Republic Day)पर ध्वजारोहण के बाद अचानक इस्तीफा देकर सनसनी मचा दी। प्रयागराज में संतों के साथ हुई बदसलूकी और यूजीसी कानून के विरोध में लिया यह फैसला। जानें पूरी खबर।

ध्वजारोहण के बाद बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने छोड़ी कुर्सी, देर रात तक DM आवास पर मंथन 

सुनें वीडियो, क्या बोले इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री 

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, बरेली

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में उस समय हड़कंप मच गया, जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट (PCS अधिकारी) अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सोमवार सुबह तक जो अधिकारी कलेक्ट्रेट में तिरंगा फहरा रहे थे, दोपहर होते-होते उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की घोषणा कर उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी।

सुबह ध्वजारोहण, दोपहर में 'विद्रोह'

26 जनवरी की सुबह करीब 7:30 बजे अलंकार अग्निहोत्री अपने सरकारी आवास से निकले और कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने जिलाधिकारी अविनाश सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लिया। किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था कि शांत दिखने वाले इस अधिकारी के मन में कितना बड़ा सैलाब उमड़ रहा है।

समारोह के बाद वह अपने कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने अपने नेमप्लेट वाले बोर्ड पर अपने नाम के आगे 'रिजाइन' (Resigned) लिख दिया। दोपहर करीब 1:30 बजे वह अपने घर पहुंचे और सोशल मीडिया पर एक ऐसी पोस्ट साझा की, जिसने प्रशासन के होश उड़ा दिए।

इस्तीफे की मुख्य वजह : संतों का अपमान और UGC कानून

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के पीछे धार्मिक और सामाजिक कारणों को प्रमुख बताया है। उन्होंने अपने घर के बाहर बैनर लेकर फोटो खिंचवाई, जिस पर लिखा था।

"संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान"

"यूजीसी का काला कानून वापस लो"

"बीजेपी व ब्राह्मण एमपी, एमएलए बायकॉट"

उन्होंने सीधे तौर पर प्रयागराज के माघ मेले में हुई घटना का जिक्र किया। उनके अनुसार, मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ स्थानीय प्रशासन ने बदसलूकी की।

वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा (चोटी) पकड़कर घसीटा गया। शिखा ब्राह्मणों और साधु-संतों की अस्मिता का प्रतीक है। मैं स्वयं ब्राह्मण वर्ण से हूं और इस कृत्य ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया है।

- अलंकार अग्निहोत्री (इस्तीफे के पत्र से)

सरकार और जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला

अलंकार अग्निहोत्री वर्ष 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं और उन्होंने IIT-BHU (वाराणसी) से बीटेक किया है। पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में ब्राह्मण जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के बजाय अपनी पार्टी के 'सीईओ' की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली को 'ब्राह्मण विरोधी' करार देते हुए अपना इस्तीफा राज्यपाल और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेज दिया है।

देर रात तक DM आवास पर चली मनाने की कवायद

जैसे ही इस्तीफे की खबर फैली, बरेली प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। देर शाम ब्राह्मण संगठनों के नेता उनके घर पहुंचने लगे और उनके समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी उन्हें मनाने की कोशिशों में जुट गए।

देर रात तक जिलाधिकारी अविनाश सिंह के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक चली, जिसमें एसएसपी (SSP) अनुराग आर्य, एडीएम (प्रशासन) पूर्णिमा सिंह, एडीएम सिटी और एसडीएम सदर प्रमोद कुमार सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की कोशिश है कि इस मामले को शांत किया जाए और अधिकारी को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाया जाए, लेकिन अग्निहोत्री अपने रुख पर अडिग नजर आ रहे हैं।

भविष्य की रणनीति : राजनीति या समाज सेवा

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह राजनीति में कदम रखने वाले हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल राजनीति में जाने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में इन मुद्दों पर समाज के बीच रहकर काम करेंगे।

यह घटना प्रदेश की नौकरशाही में बड़ा उदाहरण

यह घटना प्रदेश की नौकरशाही में बड़ा उदाहरण बन गई है, जहां एक कार्यरत अधिकारी ने नीतिगत और धार्मिक आधार पर सीधे सरकार और तंत्र को चुनौती दी है। अब देखना यह है कि शासन इस इस्तीफे को स्वीकार करता है या बीच का कोई रास्ता निकाला जाता है।

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