Lucknow: अनिता सहगल वसुंधरा के नाम रहा साहित्य, सम्मान, विश्व रिकॉर्ड की यादगार शाम




प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ




कभी-कभी शहरों की शामें साधारण नहीं होतीं, वे इतिहास लिखती हैं। 19 दिसंबर 2025 की शाम लखनऊ के लिए ऐसी ही एक शाम बनकर सामने आई, जब अंतरराष्ट्रीय बोध शोध संस्थान का सभागार साहित्य, प्रतिभा, उपलब्धि और मानवीय मूल्यों के संगम का साक्षी बना। मंच पर नाम था – डॉ. अनिता सहगल ‘वसुंधरा’, और केंद्र में था उनका शब्द-संसार, जिसने रिकॉर्ड भी रचे और प्रेरणा भी दी।





लता फाउंडेशन एवं ब्लू टर्टल प्रोडक्शंस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आयोजन में मेगा पुस्तक विमोचन, वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मान समारोह और प्रतिभा श्री सम्मान- सीजन 2 का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य (MLC) पवन सिंह चौहान रहे।






51 पुस्तकों का विमोचन




कार्यक्रम के शुरुआत की औपचारिक घोषणा के बाद जैसे ही मंच पर डॉ. अनिता सहगल ‘वसुंधरा’ द्वारा रचित 51 पुस्तकों का एक साथ विमोचन हुआ, सभागार तालियों से गूंज उठा। यह केवल पुस्तकों का विमोचन नहीं, बल्कि उस सतत साधना का उत्सव था, जिसमें लेखन को जीवन व जीवन को लेखन बनाया गया।





विविध विधाओं कविता, कहानी, सामाजिक विमर्श, आत्मचिंतन और प्रेरक साहित्य पर आधारित ये पुस्तकें अनिता सहगल की बहुआयामी लेखनी का प्रमाण हैं। यही कारण है कि उन्होंने कम समय में विभिन्न विधाओं में 51 पुस्तकें लिखने का विश्व रिकॉर्ड बना दिया। यह रिकॉर्ड न केवल संख्या का था, बल्कि लेखन की निरंतरता और विचारशीलता का भी है।





विश्व रिकॉर्ड, प्रतिभा का वैश्विक स्वीकार


कार्यक्रम का दूसरा प्रमुख चरण वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मान समारोह रहा। एक्सक्लूसिव वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और किंग्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अंतर्गत भारत और नेपाल से आईं असाधारण उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर भारत गौरव डॉ. अनिता सहगल ‘वसुंधरा’ को वर्ल्ड रिकॉर्ड और किंग्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ‘अमैजिंग ब्रिलियंस’ श्रेणी में सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लेखन को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने वाला क्षण बन गया।







कम उम्र की रिकॉर्ड धारक ने खींचा ध्यान



सबसे कम उम्र की रिकॉर्ड धारक मिस आरिबा अय्यूब शेख ने भी सबका ध्यान खींचा, जिन्होंने महज 6 वर्ष की आयु में भारतीय संविधान के 100 अनुच्छेदों का पाठ कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह दृश्य यह बताने के लिए पर्याप्त था कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।





सम्मान में झलका समाज




समारोह में सुरिंदर अग्रवाल को विजय दिवस पर 350 पूर्व सैनिकों और 16 शहीद परिवारों के सम्मान हेतु विशेष सम्मान प्रदान किया गया, जबकि नेपाल के मिलन गुरुङ को स्वास्थ्य सेवाओं, सामुदायिक विकास और मानवीय प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। इन सम्मानों ने यह स्पष्ट किया कि यह मंच केवल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना का भी उत्सव है।






प्रतिभा श्री सम्मान सीजन 2


जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (JCI) के तत्वावधान में आयोजित प्रतिभा श्री सम्मान सीजन 2 आयोजन का आत्मिक पक्ष था। इसमें साहित्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा और व्यक्तित्व विकास जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इस सूची में डॉ. अनिता सहगल ‘वसुंधरा’ का नाम सबसे आगे रहा, जिन्हें भारत की बहुआयामी प्रतिभा के रूप में सम्मानित किया गया। साथ ही सीए डॉ. महेश गौर, मनमोहन मित्तल, डॉ. डी. आर. उपाध्याय, सुरिंदर अग्रवाल, मिलन गुरुङ, जोगिंदर वर्मा और सिमरन अग्रवाल जैसे नाम शामिल रहे। मंच पर खड़े ये नाम भारत और नेपाल की उस सकारात्मक तस्वीर को दर्शा रहे थे, जहां सीमाएं नहीं, साझा मूल्य बोलते हैं।





आशा कृष्णा स्मृति सम्मान


कार्यक्रम का एक भावनात्मक क्षण रहा आशा कृष्णा स्मृति सम्मान। स्वर्गीय श्रीमती आशा देवी और श्रीमती कृष्णा देवी की स्मृति में स्थापित इस सम्मान को डॉ. अनिता सहगल ‘वसुंधरा’ और सुरिंदर अग्रवाल को प्रदान किया गया। यह सम्मान केवल उपलब्धि का नहीं, बल्कि मूल्यों और मानवीय दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरा।




मुख्य अतिथि का संदेश




मुख्य अतिथि पवन सिंह चौहान, MLC ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देते हैं। उन्होंने डॉ. अनिता सहगल को बधाई देते हुए कहा कि “जब लेखनी समाज के लिए काम करती है, तब वह केवल साहित्य नहीं, संस्कार भी रचती है।




जब शाम बन गई एक उदाहरण


कार्यक्रम का समापन प्रेरणादायी रहा। इसे साहित्य, प्रतिभा और उत्कृष्टता का उत्सव बताते हुए लेखकों, रिकॉर्ड धारकों, समाजसेवियों और विचारशील लोगों को एक मंच पर जोड़ा गया। लखनऊ की यह शाम इसलिए भी खास रही क्योंकि यहां अनिता सहगल ‘वसुंधरा’ केवल एक लेखिका के रूप में नहीं, बल्कि एक आंदोलन की तरह उपस्थित थीं। आयोजन संदेश देकर गया कि जब प्रतिभा को मंच मिलता है तो वह सम्मान नहीं पाती, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाती है।

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