Lucknow; Navyug Kanya Mahavidyalaya अटलजी ने दूरदर्शी नेतृत्व से राष्ट्र प्रथम और सुशासन की अवधारणा को किया प्रमाणित


नवयुग कन्या महाविद्यालय में अटल बिहारी वाजपेई की जन्म शताब्दी वर्ष की संध्या पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 




प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ 



पूर्व प्रधानमंत्री, युगपुरुष भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी वर्ष की संध्या पर “भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी : विचार, काव्य और राष्ट्रनिर्माण” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सांस्कृतिक समिति एवं IQAC के संयुक्त तत्वावधान में राजेन्द्र नगर स्थित नवयुग कन्या महाविद्यालय में किया गया। यह संगोष्ठी प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय के मार्गदर्शन में ऑनलाइन प्लेटफार्म ज़ूम पर आयोजित की गई, जिससे देश-भर के प्रतिभागियों को जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ। इसका प्रसारण यूट्यूब लाइव के माध्यम से किया गया। मुख्य वक्ता मध्य प्रदेश के शहडोल के कमिश्नर राजीव शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेई के “राष्ट्र प्रथम” के संकल्प, सुशासन की अवधारणा, दूरदर्शी नेतृत्व और सामाजिक संतुलन स्थापित करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अटल जी के व्यक्तित्व के राजनीतिक, प्रशासनिक और मानवीय पक्षों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।




दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. आमोद राय ने अटल बिहारी वाजपेई की काव्य-दृष्टि तथा उनके संपूर्ण व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर भावपूर्ण शब्दों में विचार रखे। उन्होंने कहा कि अटल जी की कविताएँ राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदना और अटूट संकल्प की सशक्त अभिव्यक्ति हैं, जो पाठकों और श्रोताओं को निरंतर प्रेरणा देती हैं।


गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के डॉ. आशुतोष सिंह ने अटल बिहारी वाजपेई को एक दार्शनिक कवि के रूप में प्रस्तुत करते हुए उनकी वैचारिक दृढ़ता, कंस्ट्रक्टिव पॉलिटिक्स और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा पर गहन विचार व्यक्त किए। उन्होंने अटल जी के जीवन-दर्शन को “टच द स्काई, रूटेड टू द ग्रास” की संकल्पना से जोड़ते हुए स्पष्ट किया।


प्रज्ञा प्रवाह, मेरठ से नेहा वत्स ने अटल बिहारी वाजपेई द्वारा सांस्कृतिक चेतना के निर्माण, सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने तथा वैचारिक जागरूकता फैलाने में निभाई गई भूमिका पर प्रकाश डाला। कहा, अटल जी के विचार आज भी युवाओं को दिशा और प्रेरणा प्रदान करते हैं।


अंत में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन में संगोष्ठी को अत्यंत फलदायी, विचारोत्तेजक और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेई के आर्थिक और नीतिगत दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए दूरसंचार क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी सहभागिता, “शाइनिंग इंडिया” की संकल्पना तथा बाजार शक्तियों और सामाजिक संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करने में उनके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई आधुनिक भारत के उन प्रमुख शिल्पकारों में से हैं, जिनकी दूरदर्शिता के कारण आज डिजिटल माध्यमों से इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन संभव हो सका है।


संगोष्ठी के दौरान महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा अटल बिहारी वाजपेई की कविताओं का अत्यंत प्रभावशाली एवं भावपूर्ण काव्य-पाठ प्रस्तुत किया गया। काजल अवस्थी, मुस्कान मिश्रा, प्राची तिवारी एवं आशी ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और कार्यक्रम को विशेष सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।



कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय प्रो. सीमा सरकार द्वारा किया गया। सांस्कृतिक समिति के सदस्यों प्रो. सीमा पांडेय, डॉ. अपूर्वा अवस्थी, डॉ. क्षितिज शुक्ला, डॉ. अवनिका, डॉ. चरणप्रीत कौर, डॉ. अंकिता पांडेय, डॉ. स्नेहा चौधरी एवं डॉ. सुकन्या तिवारी के सहयोग और निर्देशन रहा। तकनीकी संचालन रसायन विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता सिंह द्वारा किया गया, जिससे ऑनलाइन आयोजन की गुणवत्ता बनी रही।



संगोष्ठी में महाविद्यालय की शिक्षिकाएं एवं छात्राएं ऑनलाइन माध्यम से जुड़ी रहीं। साथ ही कोलकाता, शहडोल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोंडा, गोरखपुर, मेरठ, दिल्ली एवं लखनऊ सहित देश के विभिन्न भागों से प्रतिभागियों ने सहभागिता निभाई।



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