CSA Kanpur: गेहूं की K-1910, K-1905 और सरसों की 'आजाद गौरव' प्रजाति विकसित, जानें खासियत

किसानों की आय होगी दोगुनी: CSA कानपुर ने लॉन्च की गेहूं और सरसों की 3 कीट-रोधी किस्में

CSA कानपुर के वैज्ञानिकों ने गेहूं की दो नई प्रजातियां (K-1910, K-1905) और सरसों की 'आजाद गौरव' विकसित की है। ऊसर भूमि में भी बंपर पैदावार और कीटों से सुरक्षित रहने वाली इन फसलों की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कानपुर 

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए विवि) के कृषि वैज्ञानिकों की मेहनत फिर रंग लाई है। कृषि वैज्ञानिकों की ओर से विकसित की गईं तमाम फसलों की नई प्रजातियों को लांच कर दिया गया है। अब उत्तर प्रदेश के किसान फसलों की इन प्रजातियों की खेती कर अपनी आय दोगुना कर सकेंगे। फसलों की इन प्रजातियों के बीज को बाजार में उतार दिया गया है। उनमें गेहूं के बीज की उन्नत प्रजाति के-1910 व के-1905 और सरसों के बीज की आजाद गौरव प्रजाति है। इन्हें विकसित करने में डॉ. आरके यादव, डॉ. सोमवीर सिंह, डॉ. पीके गुप्ता, डॉ. विजय यादव व ज्योत्सना की भूमिका अहम रही।

सीएसए के मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि अब जल्द ही प्रदेश के किसानों तक इन फसलों के बीज पहुंचाए जाएंगे। ताकि किसानों को इन फसलों की खेती का मौका मिल सके। इससे यूपी के लाखों किसान लाभान्वित होंगे।

125 से 130 दिनों में तैयार होतीं गेहूं की फसलें

CSA Kanpur सीएसए विवि के शोध निदेशक डॉ. आरके यादव ने बताया कि गेहूं की प्रजातियां- के-1910 व के-1905 खेत में बोआई के 125 से 130 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती हैं। दोनों ही प्रजातियों पर कीटों के हमले का प्रभाव न के बराबर पड़ता है। एक हेक्टेयर जमीन में उत्पादन 35 से 40 क्विंटल तक है। गेहूं की इन उन्नत प्रजातियों की खासियत यह है कि ऊसर भूमि में भी बढ़िया पैदावार देती हैं। साथ ही भूरा, पीला, काला रस्ट (एक प्रकार का रोग) के प्रति अवरोधी हैं।

सरसों की आजाद गौरव प्रजाति पर तापमान का प्रभाव नहीं 

CSA Kanpur (सीएसए विवि) के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. महक सिंह ने बताया, सरसों की आजाद गौरव प्रजाति का उत्पादन एक हेक्टेयर में 18 से 19 क्विटंल तक है। इसके पौधों पर तापमान ज्यादा होने पर भी प्रभाव नहीं पड़ता है। इसकी फसल 120 से 125 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह पूरी तरह से रोग अवरोधी है। इस पर कीटों का प्रभाव न के बराबर रहता है। वहीं, इसके दाने का आकार बड़ा है, जिससे तेल 39.6 प्रतिशत तक निकलता है।


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