Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (23 फरवरी 2022)

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23 फरवरी, दिन : बुद्धवार


विक्रम संवत : 2078 (गुजरात - 2077)


शक संवत : 1943


अयन : उत्तरायण


ऋतु - वसंत ऋतु प्रारंभ


मास - फाल्गुन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार- माघ)


पक्ष - कृष्ण


तिथि - सप्तमी शाम 04:56 तक तत्पश्चात अष्टमी


नक्षत्र - विशाखा दोपहर 02:41 तक तत्पश्चात अनुराधा


योग - ध्रुव सुबह 08:26 तक तत्पश्चात व्याघात


राहुकाल -  दोपहर 12:52 से दोपहर 02:19 तक


सूर्योदय - 07:05


सूर्यास्त - 18:39


दिशाशूल - उत्तर दिशा में


पंचक


पंचक का आरंभ 28 मार्च 2022, सोमवार को रात्रि 11.55 बजे से 

पंचक का समापन- 2 अप्रैल 2022, शनिवार को सुबह 11.21 बजे तक 


एकादशी


रविवार, 26 फरवरी 2022- विजया एकादशी

सोमवार, 14 मार्च 2022- आमलकी एकादशी

सोमवार, 28 मार्च 2022- पापमोचनी एकादशी


प्रदोष


28 फरवरी, दिन: सोमवार, सोम प्रदोष व्रत, पूजा मुहूर्त: शाम 06:20 बजे से रात 08:49 बजे तक


15 मार्च, दिन: मंगलवार, भौम प्रदोष व्रत, पूजा मुहूर्त: शाम 06:29 बजे से रात 08:53 बजे तक


29 मार्च, दिन: मंगलवार, भौम प्रदोष व्रत, पूजा मुहूर्त: शाम 06:37 बजे से रात 08:57 बजे तक


पूर्णिमा


17 मार्च, दिन: गुरुवार: फाल्गुन पूर्णिमा


अमावस्या

 

फाल्गुन अमावस्या बुधवार 2 मार्च, 2022।


व्रत पर्व विवरण - श्रीनाथजी पाटोत्सव (नाथद्वारा), बुधवारी अष्टमी (शाम 4:57 से 24 फरवरी सूर्योदय तक)


विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

          

बुधवारी अष्टमी


23 फरवरी 2022 बुधवार को (शाम 04:57 से 24 फरवरी सूर्योदय तक) बुधवारी अष्टमी है ।


मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि


सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं। इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है। (शिव पुराण, विद्यश्वर संहिताः अध्याय 10)


धन – सम्पदा के स्थायी निवास हेतु


ॐ ह्रीं गौर्यै नम:


 इस मंत्र से 7 बार अभिमंत्रित करके अन्न भंडार के पास रखने पर सदा श्री ( धन–सम्पदा ) बनी रहती है | (अग्नि पुराण :313.19,24 )


घर के सदस्य की मृत्यु पर


अगर घर में किसी की मृत्यु हो गई हो तो रोज 12 दिन तक घर की छत पे एक कटोरी में दूध और एक कटोरी में पानी रख के आयें दूसरे दिन सुबह वो पानी और दूध पीपल के मूल में ड़ाल दें ऐसा 12 दिन करने से जिसकी मृत्यु हुई है उसकी आत्मा को शान्ति मिलती है उनका आशीर्वाद घर वालों को मिलता है ।

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