बीवी का ख़त शौहर के नाम

अस्सलाम वालेकुम
 बाद सलाम के अर्ज ये है कि मैं खैरियत से हूँ और आपकी खैरियत अल्लाह से नेक मतलूब हूँ ।
अरसेदराज़ से आपका कोई नविशता मोसूल नहीं हुआ,फिक्र लाहक़ है। वापसी डाक से अपनी खैरियत से मुतल्ला करें। बच्चे भी आपको सलाम अर्ज करते हैं ,याद करते हैं ,कल   अपना मंझला वाला तो पॉटी करके इंतजार करता रहा, जिद कर रहा था अब्बा ही धुलायेंगे।अब बताओ, इतनी दूर से अब्बा कैसे आते ,सोचती हूं ,एक टेंपरेरी अब्बा का इंतजाम कर लूं। बच्चों को भी तो आखिर समझाना है ।आपको आने में वक्त लगेगा, सिर्फ इजाज़त भेज दो की एक अब्बा का इंतजाम कर लूं बच्चों की खातिर।
 एक है थोड़ी उमर तो ज्यादा है लेकिन मुआ आते जाते  मुस्तकिल तका करता है। एक जरा इशारे पर तैयार हो जाएगा। अभी भी छोटे-मोटे काम कर देता है ,करवा लेती हूं जरा सा आड़ी तिरछी निगाहों से देखती हूं, बस सौदा सुलफ ला देता है । एक दो बार पैसे भी नहीं लिए। अच्छा खत्म करती हूं ,वह आ रहा है ,आटा मंगवाया था।
 जवाब जल्दी देना।
अल्लाह हाफिज ,
तुम्हारी रशिदा। 

प्रस्तुति : अयूब खान

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